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Category: hohm
जुबान जजर()ना
तूतू मै मै भ 1/2 भायी
अंदर की खाली देवी की गुफा की इज़्ज़त लूटता
और बाहर बहनो के समा(दा)ज की रक्षा के धागेधार धहाडता
न()या
u _ar _ur_oun_ed y छाया
0 t_ink no a_one माया
किसका किया कदर काया
भूल भुलयीया भय भाया
_out of ca_ to _ol 1 _an
हैसियत होती
ज़ुबान जय मरद मज़्ज़त मिया मजाज मोती
अरे किसे नगा नर निया नाम न्योति
जुबान जग जुडा जाघ ज्योति
तूतू मै मै तरा-जू तुयिया तोती
होता-2
देवी का घर नहीं होता
तो लूटते तहो तोता
और जाडो जहा जोता
घर ले अदर देवी नहीं आती
घर के अदर तो श्री ल(क्ष)जी समाती
घर की रसोई मे मर-दान-गी झाडने झी झजा
खून की रगो मे आधा जन्म का करपूर कजा
मर-द मुडे सामने इधर उधर न्योता नजा
और पीछे खलोता खुजला खजा
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w_@ is y()s & (0)
su()fe_ring
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la_er is
em_tee 0 lor_ee
suf(_ee-cent)er
an in()id _ealing wil_ on(y)li oc_ur
for _ut is em_tee of _ur()aces()all
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ever–thin_ wil_ be o-k
for w_a_t u _ar _etting go
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be p@ient for ys-lf
p@ting as in()id u y-0-s
hu()man sent_ent
b@ting
अस्सी-नब्बे=सौ सब्बे
no 1 _ees u in()id w_en
u _ar gif_ _rap_ing
mi_dfu_l_ess bo* s_apping
w_o _ill s_e th@ out
even-y1 is d_ing _am _tuff
in()id u _out
जब तुम-हारो को घर के अदर कोई नही देखता
तो कान बाहर किस किस की लकीरे खीचता
तुम तो अपने अदर नही पडते पर पर पर
और बाहर भरपूर भूलाते आ अदर मर मर मर
me_age
भरपूर गहरी गृह()स्थी के अदर
ग्रहो ग्राम उपस्थि अदर विराजमान
वास विस्तृत विष्वेष वस्ति
re_ir-कल
समाज
स्मा कल-आज-कल के कलयुग दा दरपूर दाज
so_ie-ty
0 so sy th@ in()id u so()cial _ie
_ow_r-y
a _an’ pro-p_y_ar-y
th@ _eep आधा जन्म
in()id 0s a_ry _ur-y

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