फफायी अभि()यान मान

जन जन बाहर लोटा दुयिया अदर घला घोटा
गला गोटा भला भोटा


तू बूढ़ा मै बचा शाह
सौदा समाज सच्चा साह
गन्दगी अदर आशा नि()चाह
वह वोह वारपूर वाह


तूतू मै मै ने निसने नाता नोडा
समाज सा सुधार अदर निगोडा


जहा जहा तूतू मै मै की जुबान वही
होती प(द)ढाई जन जन की पहचान


आप ने हम से शादी करके तुम
पैदा किया तूतू मै मै का समाज

ज-स्व()स्थ जय जोते

आधा जन्म जही जगता कल के किटानु कैलाने के
और सास सोते है कीटानुयो के ढेर मे सपने सजोते से

स्वच्छ बाहर तूतू मै मै स्वस्थ अदर मेरी जुबान का स्मा(दा)ज

तभी तो आगे बाहर बूडेगा आधा जन्म अदर लुडेगा

चल चल चालू

तुम क्या इतने ही भु()क्कड़ हो की गम को पता ही नही
वसोइ वी वस्तु अदर है या शौचा-लू मे जडी जही

तुमहारे घर घ असूल है
दूयियादारी दबल दबूल है
वस्तु वास वडापन वसूल है
क्यो क-वारी कबूल है

पो()शन पा

तरपूर तूतू मै मै यमायी ये यारियो ये बीमे बारो
और बीमा(या)रियो बे बरपूर बन()दर बूटायो
इलाज महु()त माली महगा मालूम मा
अब आया अत-रिक्श शय्या शा
आधा जन्म ज(ली)ही झुका झा
कितना करपूर काया का