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आधे की ख़ाली आंखे श्राप है
अपवित्र असुर अदर के बाप है
इधर उधर के भरपूर आप है
बिन मा के बचे अदर के पाप है
आधे की ख़ाली ज़ुबान की साधना के अ()लाप है
जिसको सृष्टि गोदी की ख़ाली चुपी का एहसास नहीं
उसे अपने अंदर की शांति के परिश्रम का ख़ाली विश्वास नहीं
भरपूर सास के भरपूर दामाद के पास सब कुछ भरपूर है
बस नहीं है तो अच्छी in()id gut ख़ाली प्रकृति
जिससे सृष्टि गोदी के सुर अंदर ख़ाली सहज रहते है
सृष्टि गोदी में भरपूर ज़ुबान के ताले की चाबी को रजा नहीं मिलती
और फिर तूतू में में की 1 दुनिया तो भरपूर सास के दामाद की सजा पर ही टिकी है न
तो फिर काली माता की बाहर दरशाती लम्बी ज़ुबान का कोई लेना देना नहीं है गोदी से
यह तो भपूर दुनिया की बनायीं हुई दाती है जो भरपूर को असीसे देती है
8 _ill_on धढ़ कैसे टिक गये काली माता के गले में
और भरपूर का निवाला गले से नहीं उतरता
तूतू में में की दुनिया के एक सत्य वचन के लिए में
सृष्टि गोदी के तत्व का त्याग अंदर ही कर दूंगा
यह अकेला ही खड़ा हो के ज्ञान प्रपात कर रहा है
कहा का
आधा जन्म लेने वालो को कभी नही मिलता
मोक्ष के लिए आधा नही भरपूर फलता
सम्पूर्ण सृष्टि की कोख का विनाश होते देख
ख़ाली आधे छोड़ दे और भरपूर आधा त्याग दे
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असली ल(प)ढ़ाई तो अब होगी
आधे सांप और भरपूर निवाले की
भरपूर शरीरो तो गिरा पड़ा है
अदर की बीमा(या)रियो के मर-दो
की लाठी से
लेकिन भरपूर ज़ुबान की जवानी
तो कायम रहेगी
ख़ाली माँ को ललकारो भरपूर भरो
तथा(अ) स्तु
आधे आम
हांजी
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