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0 su()e w()ere to _tart in()id s_ining art of un_air bec()me भरपूर _art
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भरपूर सास के दामाद की अदर की एक-एक न-फरत की दीवारे
gut के अदर भरपूर भू की कंपनी से गिरती है
सास का दामाद एक एक कपनी पैदा
करने मे भरपूर बस-y है
मौत के बाद का ख़ाली घर अगली सास मे
ख़ाली याद भरपूर रहता है
as y-0-s sae it’ a _mall wor_d
co_par 2
कलयुग का चक्र तो बहुत छोटा होता है
सास को कहा याद रहेगा आगे पीछे का रोकड़ा
गोदी के अन्न को इज़्ज़त से स्वीकारो
नहीं तो अदर ही महाभारत भरपूर (मा-वा)रो
उससे क्या होगा किस(ी-की)मत के भरपूर सितारो
आधा जन्म भरा रहेगा दुनिया के एक राज(बीमा)ला-रो
t-v पे बरतन के तल को चमकाने वाली बाई है
इसी लिए सास का दामाद भी भरपूर बायी भय
भरपूर वारती उतारो मगल-मारती भरपूर मय
ग्रहो के अंदर ही गहरी ()वायी भरपूर लय
सृष्टि गोदी की जुबां ख़ाली बरसती नहीं
इसी लिए हर सास भरपूर सती सही
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u _ar_y _iddle
इधर उधर लायो_iddle
सास भरपूर _iddle
अदर ही भरपूर एक_iddle
1 is _ol no idle g_iddle
ख्वाबो को आगे लाने वाले
नवाबो के पीछे भले चलने वाले
सास के अदर ही भरपूर ढलने जाले
बाहर क्या है अदर ना भूले ताल के
भरपूर मतवाले
भगवान एक
और भक्त अन्ने नेक के भरपूर टेक
फिर रखो आखे क्या नीचे फेक
कहा है बिंदी का ख़ाली रास
इधर उधर
अंदर बाहर
भीतर एहसास
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