एक टका

एक टके का भरपूर धड़


ख़ाली गले के हार की कौडियां का कर


सास कौडिया पहन के आयने मे बहुत सुनन्दर दिखती है भर


क्या भरपूर बतयाती भी-खती है खर

कितना कहा कई


आधे के बोल-()ले का ख़ाली बीमा बनवा भरो

अदर ही सब को ()रवा आप ख़ाली ()रो

पर किसी को पार की पड़ी पड़ परो

ज़िदा ही भरपूर गाड़ अदर एक गड़ो

यारियो को चीला भरपूर छत पे च()ला ()चरो

ज़ि(मर)द

ज़िंदा हो या मुरदा
सास का भरपूर घर भरपूर कब्र ही होती है
भरपूर घर को ख़ाली कब्र ही भरपूर रोती है
क्या हुया
घर को भरपूर ही छोड़ आये
कुछ ख़ाली नहीं किया अंदर


न एक भरपूर एक का दिन कोई आज की बात है
यह तो आधा जन्म की हर रात की भरपूर सु()गत जात है
एक दिन को एक रात न मिले सास का भरपूर ख्वाब वात है

भरपूर कि-राया

एक दिन एक दिन एक दिन
एक दिन गिनते रहते है
राते क्यों नहीं गिनते
अनगिनत

क्या

जितना कहा उतना ही बोला
उससे सास को ख़ाली सीधा बेसमझ आ ही गया तो बोला
कौन
भय रोया भरपूर किराया भोला

भगवन रात को सपने मे आते है
और दिन की हक्क-की()कत अदा आरते है

पता ये

सास को _t& लेना पड़ता है
_heel के धोने को दहा()ड़ने के लिये


न ज़मीन पे बैठ के नहीं रो-रेग सकती

ਅੰਦਰ ਕਿਥੋ

ਜਦ ਸਾਰੀ ਉਰਜਾ

ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਇਕ ਭਰਪੁਰ ਦੀਆ ਚੁਗਲੀਆ ਨੂੰ ਤੇ ਰਾਤ ਦੇ ਭਾਂਡੇ ਭਰਪੁਰ ਛਾਨਕਾ ਨੂੰ

ਰਾਤ ਦੇ ਭਰਪੁਰ ਜਗ(ਦੀਆ)ਰਾਤਾ ਨਾਲ ਇਕ ਇਕ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦਾ ਮਜਾ ਹੀ ਭਰਪੁਰ ਭਾ


i am _i-red ਤੇ ਹੋਣਾ ਈ ਆ

ਹਾਯ ਨੀ ਮੇਰਾ d_son
ਪੈਰ ਚੁਕ
ਸਾਰਾ ਦਿਨ ਘਰ ਦੇ ਅੰਦਰ ਪੈ()ਰਾ ਦਾ ਗੰਡ
ਖਿਲਾਰੀ ਅੰਦਰ ਆਦੇ ਆ