आमने सामने का शिकार
चुप छाप ख़ाली मजधार
बुँदियाँ का ख़ाली खुमार
आधा क्या है दिन्दा दिल्ली
नही अदर बाहर त्यार
Author: mandalalit
आधा आधे
दो लफ्जो की है गोदी की ख़ाली अहा-आणि
इसमें न कोई राजा न रानी तोपफानी
आधा दिन ध्यानी आधे रात रूहानी
दिन रात आसमान आम भवानी
आ लेले ख़ाली खज़ा खवानी
न था, है, रहेगा
बिना सोचे ही भरपूर भानुमान
गोदी के आधे का ख़ाली ध्यान
दूयिया के अदर नही है निशान
क्यो कही के पास नही है
ख़ाली ज़मीन का आसमान
आधे हरीआली गोदी आन
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ख़ाली सत्ता
गोदी में आधा ख़ाली मासूम दुसरे मासूम का
क्या जडजोर जुबान चला के शिकार करता
जो एक काल का भय भरपूर सताता
जीकर ज़ुबाने जाते जाम जमाने
तड़प तड़प ताल
भरपूर शक की नज़र नही जानती
गोदी के हक की कदर
आसमान नही गिरता जमीन नही रूकती
तब तक ख़ाली रात की रूह रही भटकती
एक-एक सास की खबर लेगा
काल का हिसाब किताब करेगा
गोदी की मिट्टी के लिये लड़ेगा
दूयिया जमीन जर्रा जर्रा डरेगा
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& tim is ru_ning _out f_own
to kee_ up _heck wit_out to_n
गा गई
अब गोदी तो है नही यहा किसी के पास
कहां आए आधे आम आस
चैन चास
चैन की ख़ाली साँस (सब को दिखावा लगती)
लेना कितना मुश्किल है भरपूर घर के अदर
(तुम) सोचते हो की (मेरा-मै) तो अकेला हू (मुझे) नही फरक पडता
(मेरे) पास सब कुछ है इस समा(दा)ज से दूर रहने के लिये
घर बगला गाडी (बीमारियो से कमाया) पैसा
यह तो अच्छी बात है
समा(दा)ज की तूतू मै मै क्या
घर के बाहर पैदा होता है
यह अकेला कौन है
दज्जिया दाज दिकलाये दडी दात
दया देर दिखाया
met-a_(or)fo()sis नही आया
तो नरनूर नरो in(नर )fo()sys क्री-डा किराया
tec_no()lo_y 0 til tie tao _till स()माया
बाम बान बाम बाया
& no
आधे ने तो सब कुछ ही त्याग दिया दंग
ren()ounce ton_ u so
हम दिखाए अंदर का डंग

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