सास नहीं होता

कहते है आधा की अंदर की मौत लाये बगैर

आधा को ख़ाली डंडे का यह-सास नहीं होता

तो gut गोदी के कच्चे घरो के दिन-रात को

ख़ाली जन्म सेखने को सिलता है

हर पहर

भरपूर किताब

तुमने तो अपनी तूतू में में की भरपूर कि-ताव की

भरपूर ला-चारी को आखो के सामने रखा


gut गोदी की आधे-राह गुजर कैसे मौत के हि-साव का

सामना कर रही है हर साँस के अंदर


अब एह-यह बचा है देखने के लिये

इधर उधर

अंदर बाहर