रक रुकते

दूयीया के दरवाजे कभी बद नही होते
बाहर क्या सुनेगा कोई कब कहा मुह खोटे
और घर अदर कैसे ताड ताड मारते नही मुक्ते
अदर ही सारा समान चुराने को चरन चुकते
मुरदो को चुराना है दरपूर दमाद दुकते