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Author: mandalalit
भरपूर ब()बाद बू बरात
बाहर कलयुग का क्या हो यह तो सास के दामाद की
आखो को भरपूर भरा (इधर-उधर) भिखेगा
और gut के अदर का भरपूर कलयुग का काम-जाम
अदर ही गर()पूर गायेगा गाठो गा गमगीन गान
बाहर के अंदर
खे खा बान
एक भरपूर ज़ुबान से जोते जान का भरपूर जहान
भूरी भुझी भान भरा भूर भे()मान
इधर-उधर काम काये तलो ती त-धार तान
भर()पूर भूले ख़ाली खा(री)खी खान
a_ur भरपूर _u_ur
pre_ail _ol ri_eous_ess wit_out to()tal left_hiou_ness
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u + to us – f_iction to p_opel ys-lf for
su(b_ect)faces g_o_th & ol @_iety of
1 j()ne-y of adha janam
दो-दी दायाँ दहे
गुरु भगवन खाड़े खोड़ खे
सांसे लिए ज़मीन पैर अंदर मिलाए
गोदी की मईया ऐसा सुरूर सा सोए
सब अपने अंदर खाये-जाये खोये-मोये
बू-की वानी ना घोलिये जो गोदी दुलारी ना सुलाए
मन का भरपूर आपा भुलाइये जो बैरी जग वेहला बतियाये
जिनको मन की खोजनी आपे अंदर गम होये
बैरी ज़ुबान जा जंदर जोर झाके जोये
अदर नहीं रौशनी राते रोम रोम रोये
चार दीवारी भरपूर चारी सो अदर धरे मधोये
अब बैठ ख़ाली खुद और ख़ाली खोज खैर खाये
चिता की चरपूर चका-चक चाक
कलेजा काटे कत अदर आत-कात
बिगड़ो बन बुया बा बद बरे बया बात
तब तहा तिलाये अदर ख़ाली खात
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सास की यह वह तो ठीक है इधर उध()र
पर y- -s का भरपूर भाठ-गाठ सामान तो
गोदी के अंदर ही छोड़ छे छ()हर छायोगे
आधा लाहर लुटा के अदर जा(सा)ली सास सलायोगे
मै मिया मी-ठू मरपूर मथायोगे
बाते बाते बाते ना ब(क)टे ब-राते
गू-का
ख़ाली मईया से मिल के भरपूर भच्छा मेहफ़ूज़ मुया म()चा
ख़ाली घर आप को भरपूर भोट भाद भी बही बिला या यीला न()चा
इस बात का बही बाया ()पका प()चा
आधा सका भरपूर भच्चा
आधे रुका
ख़ाली मा ना झुका
रहने दे घर भरपूर गू-का
खोटा खाह
सास को तो अगिननत दुनिया देखन का दाव
तो दामाद क्या खुद सास को अदर सुन साव
दुनिया भी तो दामाद को अपने हिसाब से अब ताव-हाव
घर के अदर तो फिर बहे बी भरपूर भाव
मु()खोटे कितने बेव(_oop)फ बोते बा
अनजान को जान के अंधा धुंध अदर लड़ते लाडे ला
और जब खुद को जान-ते जा जब जहा जा खोटा खाह
अदर आने का रास्ता अब साफ़ सा तो बाहर बाते भरी मौत के भार के मुह मे
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शरीर का क्या है
कश्टो की सतु(क)ष्टि तो धड़ को धोहि
शरीर तो सहा सही सुत जो ना लड़े तो लारपूर लुट
जब तुम-हारो ने सास के दामाद को अगिननत दुनिया की
हवा-ले हार हरा तो शरीर क्या साफ़ हम हरेंगे
रूप वर्णन
श्री काल्कि का उल्लेख तो हिन्दू धर्म में धारणा ही आधार मान्यता
गोदी का भरपूर अंधकार बांटने के लिये सास के दामाद को अदर फुरसत नही
और काल(मय)की की गोदी का नाम अपने अदर दहाड़ने के लिए
भरपूर फिस्सडी फन-डर अदर

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