आज का भरपूर सत्य एक वचन सुन के
अदर के अनगिन्नत जन्मो का महा-प्रलय
कैसे ख़ाली करेंगे
आज का भरपूर सत्य एक वचन सुन के
अदर के अनगिन्नत जन्मो का महा-प्रलय
कैसे ख़ाली करेंगे
जिस-तिस मनुष्य का मन ही अदर-बाहर के इधर-उधर की
भरपूर उषा की शय हो
वोह क्या
सृष्टि गोदी के अंदर का ख़ाली होगा
a na_ure is cons_ant chan_e in _hich all _ife is
chan_ing part-ic-ipation of in()id ran_e
अब लताओं
भरपूर कार्य आप से अच्छा कौन भर सकता है
इतज़ार किया तो किसका लिया-दिया
अदर भी ना सास गुजरी
बाहर भी धोखा भुला दिया
y-0-s के राज दिल से छुपाते हो और दिल ही मे
भरपूर को बसाते हो सताते रहो
सृष्टि गोदी के ख़ाली दिखावे का ख़ाली मान अंदर भरपूर रखना
कौन सिखाएगा अपवित्र असुरो को अदर ना भरपूर चखना
अंदर सास की बिंदी ढूंढ नही सकते
और बाहर कहते है
dis_over in_er s_m-fon-y
_hos on _ine
on man’ chi_led _ine
y-0-s ने तुम-हारे घर के अदर bar_er sys_em चला रखा है
और
तूतू मे मे की दुनिया मे यारियो का भरपूर दिखावे का बीमा एक wa_er बहा रखा है
भरपूर आधा किसी को i_no_ नही कर सकता
या फिर i_nor ko को भी भरपूर अदर ही करता
और तो और
भरपूर आधा अदर b-or को ख़ाली नही भर सकता
o सृष्टि गोदी की मईया
ख़ाली शुन्य हो पूर्ण विवरण की वर्णमाला के ख़ाली अक्षरों का धर्मा
mae aum()tea shunea is to()tal absolute dia lit
each breath’ mandala of all em()tee realms of em()tee being
hol 1 dark_ess e*pelling in(out)id purging
within aum()tea विद्या
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