दुनिया के नेक एक को किसने देखा चुलु भर तूतू मे मे तानी मे भरपूर डूबते डा
जरपूर जुबान जे जेखा-तेखा तभी तो तीखा तरपूर तोखा
गाठो का अदर अनुभव
ना देखा दिन-रात का भरु भरपूर भव
बे-तुके सवालो की जु-बान बिछाये अदर-बाहर जरपूर जाल
न तोड़े तिसे तक तदर तरपूर ताल
दुनिया के नेक एक को किसने देखा चुलु भर तूतू मे मे तानी मे भरपूर डूबते डा
जरपूर जुबान जे जेखा-तेखा तभी तो तीखा तरपूर तोखा
गाठो का अदर अनुभव
ना देखा दिन-रात का भरु भरपूर भव
बे-तुके सवालो की जु-बान बिछाये अदर-बाहर जरपूर जाल
न तोड़े तिसे तक तदर तरपूर ताल
०५=५०
ख़ाली चठ-बठ
ख़ाली आधा जन्म सृष्टि गोदी के अंदर दिन आधे अंदर रात
ख़ाली साँस n()w to()al आधे अठ अट अट
० नव-शिशु ५ इन्द्रियाँ _ut गोदी ख़ाली खट खट
काल के ख़ाली पुतले काला-काली कुल कठ कट कट
आँगन में बलाएँ बूंदियो की बठ बट बट
y-0-s in()id u _its _ar ne_er _out _it
भगवन को दुनिया के एक नेक के अदर की भरपूर बत्तिया बहुत भाती भा
गोदी का अँधेरा तो ख़ाली खलता भूर भागता भग भग
ju_t b-y i_no_ing –
_ill _ach y-0-s in()id u
_hink _an con_rol
_ol +
here is no qu()s_tion of
either jo_ning or s_epara_ting man-y _aes
u _ae be here for su__ime
t_ough 0 in()id u here for
total _ut _ime
here’ no_ li_mit _h@’ out t_ere
& _am _oes y-0-s in()id u s_are
गोदी के इधर-उधर तो शनि-यम मंड(ल)राते मा
पा-ताल लोक तो गोदी के अंदर ही है हा
ਅਗ ਅਗ ਕਰ(ਜਾ)ਜੀ ਭਰਪੂਰ ਭੈੜੀ ਤੇ ਭਾ(ਤਾ)ੜਦੇ ਭਾ
ਬੋਲਾ ਨਾਲ -ਬਾਨ ਨੀ ਬਲਦੀ ਬਸਾ ਬਰੇ ਬਰਦੀ
ਬੀ ਬੀ
an in()id u _av _earn_d 0_ing _ill _est u out()id 1 _t_ing
क्षमा मांगने मे माँ-बच्चे का क्ष बचता मा-बा
सृष्टि गोदी की माँ क्या लगती है तुम-हारी
जब भरपूर मा ने तुम्हे कोई सजा नही दी घरपूर घर को दुनिया की रजा भा-रायी
(मा-बा की आखो को तो सामने-आमने ना नज़र आया तूतू मे मे का भाया)
जो अपने एक को दुनिया मे ऊपर चढ़ाने के लिए कितने को निचे गिराती गा
धर-मो की बटी फ़रियाद ना धिक्कारे अदर एक बरपूर बुनियाद
a _it _ime _rive 1 be_ind 0 re()rit _y-me
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