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भरपूर घर का अन्न इधर उधर भरपूर रुला रहता है
भरपूर घर के कचरे का ढक्कन भी खुला रहता है
उससे भरपूर घर का भगवन भी भरपूर धुला रहता है
कोई क्या करे गोदो मे भरपूर घर ही भरपूर जला रहता है
गोदी की मईया को नीचा दिखाने के लिए
भरपूर सास तूतू मे मे की दुनिया के अदर भरपूर मरद के
एक धंधे का घर ऊचा बसाते है
ख़ाली बच्ची को घर के इधर उधर अदर के कचरे मे झोंका
मा-बाप को घर की अदर की सड़को का भरपूर धोका
अपवित्रता की उमर ने दुनिया का एक ना भरपूर रोका
सदियो से चला आ रहा पर-परा का भरपूर मौका
एक सबक तो ज़िन्दगी के रिश्ते ही अदर सिखाते है
उससे बाहर के रिश्तो को क्ष-मता रहती है
एक हमसफ़र होतो ज़िन्दगी की दगिया निखार जाती है
लेकिन हा भरपूर जन्मो का साथ नही तोड़ती
चलो मान लो कोई नही सता रहा
फिर अदर ही क्यो तूतू मे मे का भरपूर एक बल खा रहा
तूतू मे मे की दुनिया का एक तो मा-बाप को भरपूर सीख दिखाने के लिये पैदा हुया है
उससे अदर का भरपूर मा-बाप बन ही जाता है
ज़ुबान की सुबह और ज़ुबान की शाम कितनी मोह है कव()याली
भरपूर फिसलन से मैच करते है स्वा()याली
y-0-s in()id u की हर बात भरपूर बल मत-वाली
सृष्टि गोदी की शांति भंग करने मे कुछ मज़ा ही भरपूर ज़िन्दगी का
यह-सास आधा के लिये
मुकम्मल है इधर उधर की आखो का तोहफा भरपूर इज़हार के लिये
हर सास के लिये जरूरी है काम के भरपूर वास की प्यास के लिये
छुप चुप के श्याम के अधेरे मे काम-ना है भरपूर इतकाम के लिये
भरपूर बोल बला है तूतू मे मे की दुनिया मे एक के अदर
जाये तो जायेगे कहा चूक-अदर
ग्रहो के घरो के पूरे मन-दर
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