पिगला गाते

पढ़ाई का बल मत पढ़()आई

और सास का दामाद कहा गया है धरने
i को बाहर खरीदने खैर खाते
भरपूर भक भर अदर भय-लाते
एक-एक ना समझ बाहर बाते
पूरे पैर पड़े ना इधर उधर प()ते
परपूर पढ़ पिगला गला गाते

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जब सास के दामाद अदर नही दफा
तो दिखावा का भरपूर मुखौटा बाहर खफा
किसने वेखा ऐसा भरपूर भोटा भफा और सोटा सफा

भरपूर भोट

तूतू मे मे को बहुत चोट चाटती च ख़ाली खोट
चुप रहने से ना भरपूर तूतू के जखमो को मा-रहम मै मिला
इसी लिए अदर की तूतू को ऊचा मे चिल्लाना जरूरी बाहर मै-जिला
भरपूर शोर मचाये रहम बाहर बिकवाये बिला

भरपूर प्यार से भरपूर इत्मिनान मे घर के अदर की शाति को
भग करके गहरे जखम जड़े सास के दामाद के दगो का दारोमदार

तो बाहर कौन सी भरपूर भाति की शाति का उपचार ढूढे
सास के गाठो के कधे न गोदी के चार मीनार

घर के अंदर नहीं ख़ाली इ()वार तो अंदर ही मनायो
माली हालत की मैली-सास मुहूर्त त्यार

(दफ(ना)तरो के काम भी भरपूर भा()ति भे दफ़न दाते द-यार)

खो(सो)ए

रिसकी राद में दिन रात ख़ाली खोए


वही सांसो के ख़ाली आँसू पिरोए

ख़ाली बंधन बांध भीतर भिगोए

साँस भी तैरे सारे असीस सोए

ख़ाली जोत गोदी की बहार बोए

प्रेम सरपूर सगे

ख़ाली प्रेम के नितनेम से y-0-s in()id u के अजनबी अंदर आते आ

तू तोड़ के तो तिखा ख़ाली द(घ)र का दरवाजा

डर डही डा डोर डागे तुझे तो अदर भी न मिले सज़ा सरपूर सगे

भुना भड्डू

भरपूर शादी के मुद्दो का मडडू कीचड उछाले घर अदर भरपूर उचड्डू


y-0-s in()id u का लड्डू आधा जनम भी न गोल तारे भरपूर भाड का भड्डू


ज़ज़ा तज़ा की बात पर भरपूर बहाने बहने बो

y-0-s in()id u भरपूर त्यार के तराने तो


भरपूर प्यार पनप पहा पनाह पे
y-0-s in()id u को ही पाना परपूर पी
ख़ाली याद तो गुनाह अंदर अ-वार-गी
मेरे भरपूर को न रुलाना तू रोयेगी भी

कौन काया

अस्थिर ऊर्जा अस्थिर विचार अस्थिर आदते
(सबसे पहले कौन भाया)

सास के दामाद को क्यो (इधर-उधर) पार ही केद्रित करती का

भरपूर क्यो यान का ध्यान सास का अदर-बाहर करता (उड़ाना) धर्ता

अब तलो की बीमा(या)रिया तो gut _ur_ace()all मे तैरती बहरी बेड़िया

इससे सास का दामाद भी तल के ऊपर साफ़ तैरता तेड़िया

भरपूर का भरपूर भडार भायदा भिड़या