y-0-s in()id
u _ar_y _iddle
इधर उधर लायो_iddle
सास भरपूर _iddle
अदर ही भरपूर एक_iddle
1 is _ol no idle g_iddle
y-0-s in()id
u _ar_y _iddle
इधर उधर लायो_iddle
सास भरपूर _iddle
अदर ही भरपूर एक_iddle
1 is _ol no idle g_iddle
हम मईया की ख़ाली आँखों में ही
काले-से-सफ़ेद-से-काले होते है
गोदी की आयने ख़ाली ही मजबूत होते है
सृष्टि को संजोए भीतर की धारे ही
ख़ाली साँस होते है
ख्वाबो को आगे लाने वाले
नवाबो के पीछे भले चलने वाले
सास के अदर ही भरपूर ढलने जाले
बाहर क्या है अदर ना भूले ताल के
भरपूर मतवाले
भगवान एक
और भक्त अन्ने नेक के भरपूर टेक
फिर रखो आखे क्या नीचे फेक
कहा है बिंदी का ख़ाली रास
इधर उधर
अंदर बाहर
भीतर एहसास
बाहर के जग के आड़े भरपूर अदर ला के जुगाड़ को अदर-बाहर जुड़ाते है
जग जग जियो तूतू मे मे की दुनिया के लाल लट्टू लते है
बाहर तूतू मे मे की दुनिया मे आधा चिता बिछा राखी है और
अदर दुनिया की आधा जनता भरपूर खाड़ी है
यह तो घड़ी(किसकी-क्युकि) में छोटा हाथ
और बड़ा हाथ दिखावे की भरपूर झाड़ी है
बलराम, सुभद्रा, नीलामणि को ख़ाली आधे मईया ही मिली
gut ब्रह्माण्ड के काल-रात्रि-युगा के भू के अंड में
छोटी सी चाबी से पूरा घर खुल जाता
भरपूर सास कितना (खु-घु)ला भाता है
क्या मे()मानो को अदर बद करके आता
इसी लिये बाहर आखो का भरपूर छाता
तूतू मे मे की दुनिया के धर्म स्थानो के अदर का
भरपूर दिखावे का बाहर आदर
भरपूर घर के अदर का ख़ाली भरपूर आ-दर
You must be logged in to post a comment.