ख़ाली आँखे

हम मईया की ख़ाली आँखों में ही

काले-से-सफ़ेद-से-काले होते है


गोदी की आयने ख़ाली ही मजबूत होते है


सृष्टि को संजोए भीतर की धारे ही

ख़ाली साँस होते है

सुने()रा सोने वाले

ख्वाबो को आगे लाने वाले


नवाबो के पीछे भले चलने वाले


सास के अदर ही भरपूर ढलने जाले


बाहर क्या है अदर ना भूले ताल के

भरपूर मतवाले

खारी लड़ी

बाहर तूतू मे मे की दुनिया मे आधा चिता बिछा राखी है और

अदर दुनिया की आधा जनता भरपूर खाड़ी है


यह तो घड़ी(किसकी-क्युकि) में छोटा हाथ

और बड़ा हाथ दिखावे की भरपूर झाड़ी है

चा()बी

छोटी सी चाबी से पूरा घर खुल जाता


भरपूर सास कितना (खु-घु)ला भाता है


क्या मे()मानो को अदर बद करके आता


इसी लिये बाहर आखो का भरपूर छाता