मितने मूह मिटने माते
खितने खूह खिटने खाते
लितने लय लिटने लाते
तुम तो हमेश ही रहोगे गोदी के नत-मस्तक
तो क्या घर के भरपूर अदर एक-एक डरोगे
गोदी के इंसान की ख़ाली दस्तक
सोते जागते y-0-s in()id u के मरोड़ घर के अदर भरपूर हथोड़े दौड़
मितने मूह मिटने माते
खितने खूह खिटने खाते
लितने लय लिटने लाते
तुम तो हमेश ही रहोगे गोदी के नत-मस्तक
तो क्या घर के भरपूर अदर एक-एक डरोगे
गोदी के इंसान की ख़ाली दस्तक
सोते जागते y-0-s in()id u के मरोड़ घर के अदर भरपूर हथोड़े दौड़
आधे ख़ाली खमय खान खक खी खहि
खितने खरे खतरे खुपड़े
भरपूर भलयुग भय भसुर भपडे
बस-बस अब नहीं है भरपूर सास का फायदा
गोदी के अंदर है ख़ाली काली कमय कायदा
ever-y-thing y-0-s in()id u _ar e*/i-encing is out()id of y-0-s
& _h@ re_ain in()id is f()ee-d()m of ever-y1′ y-0-s in()id u en sous ma_n
on j()n()y is al_ost o-ver
le_to-ver is c_over
ri_ in()id _ange _over
भरपूर ख़ाली लुटा लो-वर
ਕੋਈ ਸਸ ਦਾ ਕਿਵੇਂ ਬਿਗਾੜ ਅੰਦਰ ਬੜਦਾ
ਜਿਹੜੀ ਆਪ ਹੀ ਅਦਰ ਦੀ ਮੇ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਦੀ ਤੂੰ ਨਾ ਜੋੜੀ ਜਦੀ ਜਾ
बिन-मा के भरपूर कु-वारे
तुमने hi छूत के मुझे पवित्र पा लिया
भरपूर मर-काट के ही सब जी पक पकाती पा
हम हो भूखे भी भही भायेंगे बिना मर-बूर
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बाहर भरपूर नक़ल की बिना अदर येहसास शकल की अकल को बहार भरपूर अकाल आते आ
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ब()मीज़ तो भरपूर है सास की तलो की तमीज पर क्या भरेगी अदर भरपूर एक एक का कम-eas
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बिना क()मो के कोई किसी से मिलले माता आता
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न तो तुम हमें बैठने देते हो न खड़े होने न उड़ने न सोने
तुम्हे हमे नज़र न्योते न
चलो यान लो
y-0-s _ur is _ear
सास को अदर एक एक से अलग होने का दर अदर ही खड़काये खार खा खेहर
हाय मेरा १०० का भरपूर आधा टके का वाट वता पूर
0 in _er_ice
0 _ut dam_er on y-0-s in()id u _ood
0 _ife re()urns a_t-er _all
_eep tu()n-ing on _ife un0 _u()vive wit()out wi-fi
y u()g out to e*/i-ence wi_hout in()id _urge _out
u un0 t_ink & li_10 @ same _ime
i.e. _ow y-0-s e@ing in()id u _ime
for in()id u ne_er a_one
& out()id _lone y-0-s _eeking c_one
a _ol y-0-s in()id u _an e@ out
wit_out _oing in()id _out
a weil_age _an i_enti_y y-0-s in()id u _oot c_use of min_full_ess pat_er-n _ie
an ever-y1 p()oblem _as a _olution is _ol pro_lem
a _ol is g()eater than _um of ha_f _arts
y-0-s in()id u _ar 0 on w()ong end of on
& u _ar ri_ in()id out()un
अपवित्रता को मापा जा सकता है
क्यों नहीं
a ha_f कलयुग is _ol me_sur of _alf सास on कलयुग जुग जुग
an i-नर-tia in()id en-er(_un)gi can0 be de_t()oyed
तो फिर लाठिया मरने से अदर क्या टूटेगा
सास की भरपूर जात का क्या नाम है दुनिया मे एक-एक के अदर
dis()man-tle in()car_ation b_un_er
fool को ish से @_ac_करने वाली y-0-s in()id u तो भ()वन से भी बड़ी _ish फा
सास का शरीर रात भी नही भरपूर राख रोती
आत्मा अंदर की दिन-रात की ख़ाली ज्वाख ज्योति
काल्कि का अंदर ख़ाली अवतार
gut मे प्रलय की लय का उप-चार
पुराणों मे न दिखा लिखावट का ख़ाली नार
सांसे ख़ाली अंदर अनंत आर-पर
ख़ाली घर अखंड भीतर आधार
ख़ाली टेक धरो दिव्यां-ज्योति के ह(र)जार
जब आधे-आधा सास के अदर होके
एक नही रह सकते
तो पेरो की मियानी में दो मरद कैसे
कल कल करते का
सीधे सीधे बतियाओ
एक घर के अदर दो ()रद रो रुकते रा
येसा थोड़ी दिखता दा
शुद्ध शादी फेरो की फूटी फ
दुनिया की एक बर्बादी मोल मली मय
क्यो नही पल सकते पाछे पभी
बनेगे तो भरपूर भक्के बही
हम दो हमारे दो सच्चे सती
on is @ beg()ing _end of b_am
y-0-s in()id u _ar @ other _end of s_am
wor_t is _um()here bet()een u as_ y-0-s _ol _aim
for u _ar @t ri_ p_ace y-0-s in()id u _ip _ime _ac
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