हमने तो यही है आज पाया
गोदी का भीतर ख़ाली खाया
अपनो ने पूरा आधा दिखाया
गले में आधे दरा दबाया
तुमने दहरा दाज गवाया
इधर उधर आधा भिखाया
अदर बहार एक बूढ़ा बढ़ाया
गाठो गा गढ़ गट गे गिठाया
Author: mandalalit
नींदी()नी

बिंदी बीचे
आँखे मीचें
ऊपर नीचे सींचे
इधर-उधर भाली भीगे
अँदर काल कारा कींचे
()हाज-हहा()
दुनिया के एक-एक असुर ने ही सूखा सिला सा
गोदी के माँ-बच्चे के सुरो सी ख़ाली खिल-ख्या()रियाँ
अब आना अहा आ
_ai_ing _ead chil_r()n’
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हम तो आज ही आरे-नारे
तुम-हारे हिटने हारे-वारे
कि()को ()ला
सासो सा ()हाज वाता की वडपूर वृत्ति से ड()म-गाता गा
किसको को साथ स()नावे स्यू सही सेके से
असुरो के ()र-दार
सोच सो सोच साढे
जूठे ज()त जड ()जाडे
@ed
i am 0 _ur w_ere it _rigi()nated
_id it l& on y ton_u ti2()lated
_ow
रोga
sun_ise yo_a _@c_es _ir in()id _un_et भोga
1 un_verse गोदी से मैच महि मड़ता
ता रा
भरपूर भ()दा भूडा भास सास सा सरीर
कैसे किठाये क्यो नही क()न का ()कीर
0_ing vs ever-y-t_ing
हम-आरा अनुभव कभी तुम-हारो के भाव से सच सही सड़ता
तुम-हारो के नर का तन कौन साफ़ सड़ता
दुनिया की एक शाति आयी कहती क्यो कही कडता
क्यो के कितने कास कड़े को
अदर गी गडपूर ग()मी गी गोलता
गोदी में to()al he@ _ave से क्या कोगा
क्यो कही काडा किया ()कोर
s_yl _on
u _ar 0 a_on
is th@ 0 p_on
re_li_y is u s_on
ri_ 1 0 c_on
0 so im_oos_ible _all _it in
1 _oise is ho_y _ho-ice 0 a_ead @_ending
y-0 _@ur-ally dra_n _eels ri_ _vi-dence pre_ending
y-0 soci_li_ing is _ol fu_ re_a*ing it ru_n res_enting
की-मच
पंछी तो ज़मीन पर बैठते ही नहीं पैर
तो चलो क्यो नही को दुनिया दा
कडपूर कूड़ा कि-खाते
कितने
क्यो नही रुड राते
पंछी दुसरे पंछी को मार के कच्चा खचा खच खाता
असुर किसे पकाते घर के अदर बहाते
खु()बू खा()ोश खो
ਕਿੰਨਾ ਦਾਨ ਦਹੇਜ ਸੁਟ ਸਾਦੇ ਦਫ(ਨਾ)ਤਰਾ ਦੇ ਦ()ੜਪੂਰ ਦਾਤੇ
ਤਦਿ ਤੇ ਗੁਟ-ਗਟ ਅਦਰ ਪੂਰੇ ਪਾਰ ਪ()ਹੇਜ ਪਤੇ
u _no it _ill ne_er _ap_en
हम-आरी गट गट गाटे गी तुम-हारो की क्यो नही की(मची)मारी

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