आज से शुरू हुया हर जुबान का ताला
नही खुलेगा कलयुग का हिम्मतवाला
रखना अदर सास कदम कम काला
चाबी चाव चुप चढ़ी चार चाला
ख़ाली बहेगा अंदर का रूखा रखवाला
धरती की गोद हरी-आली आधे ज्वाला
आज से शुरू हुया हर जुबान का ताला
नही खुलेगा कलयुग का हिम्मतवाला
रखना अदर सास कदम कम काला
चाबी चाव चुप चढ़ी चार चाला
ख़ाली बहेगा अंदर का रूखा रखवाला
धरती की गोद हरी-आली आधे ज्वाला
तुम-हारी सोच का समाज
बदी बनाया अदर भरपूर दाज
तुम्हे न समझ साया नवमी नाज़
काले करे काखे काटे काया काज
1 _y-urveda believe 0 operate on fullness mind principle s_ealthy
start y 0 mo_ning s_ape y 1 everyday healthy
i(नर)tia ali_n out/in hol routine ve_lthy
soj()n sotot rest of day _ea_th pi-thy
the_ _ar stal_ing out c_asing a d_ead no_n
ever_here go_s in cro_n
मिले सुर मेरा तुम-हारा
तो सुर बने जहा(भरपूर)यारा
अदर दग्गियो का दवारा
निकला देश बाहर कुवारा
मिले न इधर उधर सहारा
कानो का कमरा कारा

1 hea_t b_eak 0 _art _re_k
he _ach _eak
दिल भरपूर टूटे
टोटके बाजार लूटे
हाल हजार तुमदुम छूटे
बद ही अदर भरपूर फूटे
खुला न बाहर बहाये टूटे
ख़ाली बुँदिऊ की सृष्टि मईआ
बुँदिऊ में सृष्टि ख़ाली स्वाईआ
भरपूर इसानो के भग्वान
भक्तो के भक्त भरपूर महान
अहंकार की हाहाकार जान
चल चला कलयुग का कान
You must be logged in to post a comment.