ये रा तो त नहीं केश में मिलता और व छुपा रखा है
दामाद में हवा भारी है की
उ()फ उया किया
जब घर की जिदा लाशो की सफाई नही इतनीअदर प्यारी
तो हस-पताल मे क्या भरती मुरदा शरीरो की शायरी
hi बीमा(या)री hi बीमारी hi बीमा(या)री
आना तो है यही बू-ढा शरीर भारी
और जवान है नर की जू-बान अदर उडारी
रुको आधा
आधे को तो अंदर जनता नहीं त्यार
फिर कौन दिखाये आधा कब्र है बेकरार
a tar
what _ar pro_ein ba_s
for w8 li_ting rit & rit
*
कीटा-नु
आधे
कीटा-नुयो के अदर से अणुओं
को अंदर-बाहर निकालता
इससे किता को तो
तकलीफ ताजी
आजी
0 much
ever-y1 is saeing in()id & 0 here
well
adhe’ really 0 _ood rit & rit 1 enough th_er
0 that
gud (eve_y side)
bie bie
0 m@er
emptee i aum
afraid
this good side 0 looks rit bie
till new place comes in for tri
y-u_c_ers y_o
रूप-रूप
द्वापर के कृष्णा के 16००० रूप
एक-एक पूर्ण अंदर भूप
राधे के लिए ख़ाली बाँसुरी
अंतर्मन स्वरुप
ऋणी सुराही
हम है सृष्टि गोदी के ऋणी
हमारी आज़ादी है गोदी की ध्वनि
गोदी ने दी है हमें ख़ाली मणि
मिट्टी का घड़ा ख़ाली सुराही
शरीर का सड़ा सारा स्वाही

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