y() life in()ide u is y()s to serve u-bodi’ mind are y()s ser()ing gut surface()all world
sa_h@
a y() va()na is cunning y() sa_()iet-y
&
_ome s_ee a-lon h()it-y
_outh
की तुमने आधे के मुँह से सुना है कभी
an emptee intentions within _outh
&
within lap of nature alon _outh
गोदी में बूंदियो के मुँह होते हे ख़ाली बंद
देह की तेह
आधे की देह की तेह जब ख़ाली होती है
तब to()tal देवी की काली आग आती है
आँखों को रात को रुला रोती है
पर एह क्या बाहर क्या देखती है
वा()ना
वा को ना नहीं भाती है
भरपूर हा सब को जगाती है
क्या काम
आप की सास का क्या नाम है
gut गोदी के अंदर
रोगी (रोग को लेकर रोता ही रहता है)
भोगी (भरे भोग के टीके रोज लगाता है)
योगी (दिन रात योग सताता है)
an emptee breath lie
_tr8 o_n f@ emptee _round
गोदी तो आधे ही होगी
आधा तो है रोगो का भोगी
योगी को क्या पता कब दस्तक रोगी
गोदी तो आधे की ही होगी
in(_ul )ation
wh@ is o_n()ine con()ul()tation
जिसमे आप को अपने बोलने का भाडा भरना पड़े
फिर आप भाड़े पे क्यों लेते है इधर उधर की क्यों
सीधा तो किसी को समझ मैं ही न हीं आता
होता
बाहर का शरीर को अंदर खोने से
अंदर की साँस का प्यार कम होता है
कम नहीं गायब होता है
नहीं नहीं पैदा होने से पहले का ही मर्द-मुर्दा होता है
इसी लिए अंदर भी बीमारीयो का यार होता है
जो याद में रात को रोने देता है
तग
कोई किसी को जान भुज के भुझै या ना
वा()ना तो तग भर्ती है न अंदर
कहा भर्ती होने जा रहे हो
आज में कल गायब रहता है
thin_ without
in()id u
u ex()erience of y()s
in()ide is nothing _ame
as in()ide out in
u w_nt an out()ider to com in()ide u
&
_ive u good-bad trea()s
& w_en _reats be_om _trict
t_en y()s _un awa
from in()ide u
आसान
किले को ख़ाली आज करना
बहुत ही आसान है अंदर
इक लात यह है की उससे कल की
तूतू मैं मैं का संत-ुलन बिगड़ता है
पर लगे रहो उन्ना भाई उन्न्दा खुश होगा
(पिछली सास ने क्या ख्याल खाया था याद है इधर उधर)

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