बाहर तूतू मे मे की दुनिया मे आधा चिता बिछा राखी है और
अदर दुनिया की आधा जनता भरपूर खाड़ी है
यह तो घड़ी(किसकी-क्युकि) में छोटा हाथ
और बड़ा हाथ दिखावे की भरपूर झाड़ी है
बाहर तूतू मे मे की दुनिया मे आधा चिता बिछा राखी है और
अदर दुनिया की आधा जनता भरपूर खाड़ी है
यह तो घड़ी(किसकी-क्युकि) में छोटा हाथ
और बड़ा हाथ दिखावे की भरपूर झाड़ी है
बलराम, सुभद्रा, नीलामणि को ख़ाली आधे मईया ही मिली
gut ब्रह्माण्ड के काल-रात्रि-युगा के भू के अंड में
छोटी सी चाबी से पूरा घर खुल जाता
भरपूर सास कितना (खु-घु)ला भाता है
क्या मे()मानो को अदर बद करके आता
इसी लिये बाहर आखो का भरपूर छाता
तूतू मे मे की दुनिया के धर्म स्थानो के अदर का
भरपूर दिखावे का बाहर आदर
भरपूर घर के अदर का ख़ाली भरपूर आ-दर
ज़िन्दगी की श-रते सुबह को रगीन हो जाती है
दोपहर को सगीन सग आती है
शाम को भरपूर तक़रीर सुनाती है
राते भरपूर भर भर गम घोलती है
देवो के ख़ाली देव
नंदी के महा-देव
चन्द्रमाँ का आधा सेव
ख़ाली पर्व की सती के सदैव
ख़ाली अन्तर(म)यानि है
भू के ख़ाली त्रिदेव
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बाहर के जग के आड़े को अदर ला के जुगाड़ को बाहर धोते है
जग जग जियो तूतू मे मे लाल के रटे रोते है
यानि की एह लो
ख़ाली मान लो
ध्यान नहीं है
निकाल दो
आखे गम है
रुमाल लो
सर पे चढ़ा ले
बाल पहले गिरा लो
_oor lit_le i a_wae _ets no s_o
that’ 0 okae mo
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