गोदी के अंदर मर-दान()गी झाड़ते है
और गोदी में छोड़ के वापस आते है क्या
शरीरो के जले हुये ()रद की भरपूर राख
गोदी के अंदर मर-दान()गी झाड़ते है
और गोदी में छोड़ के वापस आते है क्या
शरीरो के जले हुये ()रद की भरपूर राख
अदर के कम-रो के क()मो को भोगने आये हो
अदर के बाहर
तो की सृष्टि गोदी के अंदर को रोगो गे
सास की अपवित्रता से असुर
तुम(अदर)हारी की भरपूर कर-तू-तो मे का प-रदा
भरपूर मा-बाप से छिप सकता है
गोदी की ख़ाली आहों से नहीं
_h@ is or-i_inal _orm of _abi?
तुम कल भी बे-गाने थे
तुम आज भी भ-गाने भले हो
तुम कल भी बह(ी-खा)ने हो
अपवित्र असुर घर के अदर दिखावे के लिये
कमी-ने एक-एक के लिये भरपूर स(द)ड़के है
तुमने आधा जन्म को दुनिया के अदर-बाहर एक-बना दिखाया
दुनिया का अदर साया भरपूर सर-माया पूरा चढ़ाया
चाहे रुखसत हो जुबान की मैली नक़ल
या खफा जाने दो भरपूर की शकल
कल आयने मे आज रुकता रहा
आज भी दुनिया के -माने मे भरपूर बिकता बहा
अग-अग_razi करना कहा सिखाया
wa_c_ing on wor_d’ coo coo y-0-s in()id u
बेडा पर एक गया _ar आया
दुनिया के इक दिन की इक धुप-छुप तड़ी बेज तो तही ता
भरपूर को ग()मी को s_er_ize सारती सा
अब _as_t_oph तो gut के अदर ही आयेगा न और
बहार सोना चम-चक-मकायेगा
दुनिया मे कोई भी भगवन से बड़ा (neither – nor =) नही होता
—————-
ख़ाली मईया की गोदी जैसे ख़ाली तो सारे ही सोने सा
और ख़ाली गोदी ही भगवन को ख़ाली -खती खा
इसी लिए भगवान सुरक्षित ख़ाली साक्षी सक्षम सा
mae ख़ाली हम_ili-tee _ring p_e_ce in()id u
क्या
मा-वा का दुनिया से भरपूर रि-श()ता होता है
जो re()श्ते के अदर ही एक वा को खोता है
अपवित्र असुर ही अपने घर के अदर दुनिया के एक एक को उ-चा-चा रखते है
कहा यह गया मे एक तो ग्वाच ही गाया
_y _other is on _ause of m-y _app_ness
& गोदी तो होगी ही नाराज अदर के दामाद की pit_ness
a tr_e भरपूर fr_end_hip has un_ers_ood in()id
u
_et to be in()id un_er_tood by भरपूर t_ue f_iends_ip
()ach in()id u _oment is भरपूर beg-inning
0
en_ing in()id u t_ending /ever भरपूर men_ing
a भरपूर l_ve is a _ace in _hi()ch on-ly _other _ops
in()id on wor_d ()lop
दुनिया का(की) भरपूर ज़मीन भरपूर आसमान
भरपूर घर बसाते है अदर दुनिया का एक इम्तिहान
आधा जन्म भूल-आते है अदर भरपूर मे()मान
अदर ही भरपूर डुबाये भरपूर उभरे एक महान
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