आधा जन्म दरपूर दोसत
आधा जन्म दरपूर दुश्मन
तूतू मे मे तू-तान ताल टह()चान
अदर-बाहर एक-एक उरे-शन
परे इधर-उधर शेर-पुर शान शम-रन
लाह – पा
भरपूर की इधर-उधर गलती
सास अदर सही सुलाह शहर सल()ती
जले जो जाये ऊपर जय निचे जय जलती
हमें झा झरना ज़मीन जिसकी जलती
घर – आंखे
गोदी की आंखे तो ज़मीन पे
सास की भरपूर कर-तू(मे)तो तो तेखती तही
भगवन को तो ऊपर का फल तोड़ने की भरपूर इच्छा होती
सास के दामाद की तूतू मे मे दुनिया के एक-एक की पढ़ाई
अदर ही भरपूर भूचा भरती
घर दे दाहर दो दूर की दात
तुम-हारी मे ने घर के अदर ही
ज़ुबान के अन्न-गनित बायने वास्ते विनयाये
जब जी बाके बान बरपूर बू बढ़ाये
0 c_an_
0_ing _an be _one
_or ever-y-t_ing _et to be
0 un_one
ju_t _ent
_le_t_ic 0 si_ent
_ear is _iver _ent
_ar 0 t_ough _ent
in()id s_ain b_ow _ent
& y-0 _et _ol 0 _ent
0 s_in_
y-0-s in()id u _u()man’ in10_ions _ar
p_ar_ing ever-y1 _oud _ol() de10_ions
ar_iving/de_arting _ut _ur_ace()all
in_tin_ts fee_ing y-0
c_oud 10_ion
01-01-01
no_ तक
सासो के दामाद द्वारा की हुई दुर्गति को कब तक
दूर की भरपूर गति भारमयोगे और अपने अदर
एक-एक दर परपूर पायोगे या सरपूर सरायोगे
0 _ince bi_th or else before hea_th
i do
0 _av _ime
2
0 _ess _ime
ever-y1-t_ing _ran-s_orm in()id 0s _y-me
y bo_i _hang for y-0-s
_et in()id u de_ange
_eep _aeing
_ar vi t_ere _et 0 chan_e
on-ly _reason y-0-s hu()man _av 0 evo_ved
for u _eep _aeing y-0 _oint un_no_n yo_ed
ख़ाली सांसे
सृष्टि गोदी की ख़ाली ज़मीन में
आत्मा(तत्व)शक्ति की जरूरत ख़ाली सांसे
अंदर-बाहर धहलती धारे ख़ाली झांसे
इधर-उधर अटकाए ख़ाली फाँसे
टेक टिकाएं दाएं-बाएं ख़ाली दिलासे
being 0_ing pa()rent
adha janam _as to()tal no()thing to _ae
wit_in _ap of _a_ure 0 _ae
ख़ाली आन
सृष्टि मईया की गोदी अंदर आधे
ख़ाली महा(अनु-आन)बारक

You must be logged in to post a comment.