भरपूर बहा-दुर है कितने
सास के इधर उधर जि-तने
घर के अदर अकेले बैठे ही क()मो को
भरपूर एक करते है
शो-वास शाबाश
भरपूर बहा-दुर है कितने
सास के इधर उधर जि-तने
घर के अदर अकेले बैठे ही क()मो को
भरपूर एक करते है
शो-वास शाबाश
सृष्टि गोदी की जुबां ख़ाली बरसती नहीं
इसी लिए हर सास भरपूर सती सही
मां तो कभी खफा नहीं होती
भरपूर से
तो तुम क्यों नहीं दफा होते
तूतू मे मे की दुनिया के एक-एक के
अदर से
वेहला सास जगल मनाये मगल
for it is pa_sing _arsh _i-me
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ever-y1 b_ind
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u _ar_y _iddle
इधर उधर लायो_iddle
सास भरपूर _iddle
अदर ही भरपूर एक_iddle
1 is _ol no idle g_iddle
ख्वाबो को आगे लाने वाले
नवाबो के पीछे भले चलने वाले
सास के अदर ही भरपूर ढलने जाले
बाहर क्या है अदर ना भूले ताल के
भरपूर मतवाले
भगवान एक
और भक्त अन्ने नेक के भरपूर टेक
फिर रखो आखे क्या नीचे फेक
बाहर के जग के आड़े भरपूर अदर ला के जुगाड़ को अदर-बाहर जुड़ाते है
जग जग जियो तूतू मे मे की दुनिया के लाल लट्टू लते है
बाहर तूतू मे मे की दुनिया मे आधा चिता बिछा राखी है और
अदर दुनिया की आधा जनता भरपूर खाड़ी है
यह तो घड़ी(किसकी-क्युकि) में छोटा हाथ
और बड़ा हाथ दिखावे की भरपूर झाड़ी है
छोटी सी चाबी से पूरा घर खुल जाता
भरपूर सास कितना (खु-घु)ला भाता है
क्या मे()मानो को अदर बद करके आता
इसी लिये बाहर आखो का भरपूर छाता
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