a na_ure is cons_ant chan_e in _hich all _ife is
chan_ing part-ic-ipation of in()id ran_e
a na_ure is cons_ant chan_e in _hich all _ife is
chan_ing part-ic-ipation of in()id ran_e
अब लताओं
भरपूर कार्य आप से अच्छा कौन भर सकता है
इतज़ार किया तो किसका लिया-दिया
अदर भी ना सास गुजरी
बाहर भी धोखा भुला दिया
y-0-s के राज दिल से छुपाते हो और दिल ही मे
भरपूर को बसाते हो सताते रहो
सृष्टि गोदी के ख़ाली दिखावे का ख़ाली मान अंदर भरपूर रखना
कौन सिखाएगा अपवित्र असुरो को अदर ना भरपूर चखना
अंदर सास की बिंदी ढूंढ नही सकते
और बाहर कहते है
dis_over in_er s_m-fon-y
_hos on _ine
on man’ chi_led _ine
y-0-s ने तुम-हारे घर के अदर bar_er sys_em चला रखा है
और
तूतू मे मे की दुनिया मे यारियो का भरपूर दिखावे का बीमा एक wa_er बहा रखा है
भरपूर आधा किसी को i_no_ नही कर सकता
या फिर i_nor ko को भी भरपूर अदर ही करता
और तो और
भरपूर आधा अदर b-or को ख़ाली नही भर सकता
al_ice in on_er-l&
loo_ing t_ough _lass _h@ y e*p&
ever-y1 is full of _reen y-0-s _ass in()id u s&
भरपूर घर का अन्न इधर उधर भरपूर रुला रहता है
भरपूर घर के कचरे का ढक्कन भी खुला रहता है
उससे भरपूर घर का भगवन भी भरपूर धुला रहता है
कोई क्या करे गोदो मे भरपूर घर ही भरपूर जला रहता है
गोदी की मईया को नीचा दिखाने के लिए
भरपूर सास तूतू मे मे की दुनिया के अदर भरपूर मरद के
एक धंधे का घर ऊचा बसाते है
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