श्री गणेश को विद्या-पढ़ाई का भगवन मानते है
और
सास के अदर विदाई की आई के आड़े नही भरपूर काटे
हठी दाते दिख(आ)वे के दाते दा
दिखावा क्या पड़()दा दा
श्री गणेश को विद्या-पढ़ाई का भगवन मानते है
और
सास के अदर विदाई की आई के आड़े नही भरपूर काटे
हठी दाते दिख(आ)वे के दाते दा
दिखावा क्या पड़()दा दा
किराये के घरो मे शरीर क्या खरीदे होते है
तक(दी)रीर कैसे खरीद सकते है जो आधा जन्म की बद()लत है
सास तो शरीर का मर()वीर बेच के भरपूर सोती है ताकि रात की
घुटी बात का बुरा भरपूर दामाद को दिन मे न यहसूस हो
अच्छा अच्छा इसीलिए हाथ जोड़ के
खड़()पूर ही खड़े खाते खा
तुम्हे पहले ही y_ar_ing दे देते है
तुम-हारा भरपूर ह()हारा इधर उधर का
भरपूर बिगाड़ बही बाता
fu_l _oon की जोड़ी जा
एक-ing से बनायी बा
_ull _ur(re)vive o करेगी दुनिया के
एक-एक का ()जा
कमजोर सासे अपने अदर इधर उधर को नही खाक खर खक्ति
तो क्या तूतू मे मे की दुनिया के इक इम्तिहान की खाक नि(वा-ले)खारेगी
अन-गिन()त आधा जन्म के अदर
सास को अदर की इधर उधर की बीमा(या)रियो
ने भरपूर भेर भरा भय-कर
अब उससे ऊपर क्या होगा
ख़ाली कं-कर का अन्न-कर
gut के अदर जल-कर
दामाद तक पही पहुचेगा बल-कर
सुरग मे ही आयेगा उछल-कर
ज़ुबान पे मचला भरपूर चल-कर
भरपूर सास के घर का अनपढ़ नही पड सकता ख़ाली अन्न का धड़-धड़
तुम-हा-रा सास की भरपूर भक्ति का एक निवाला
अदर नही लाया भू-ताला
निवा रह गया मोह-भाया का जाला
इधर उधर बिछाये उचा भरपूर भाला
तूतू मे मे की एक दुनिया के समाज के कधे तो काम-जोर भरपूर है
तो अदर भी तो टके-टके बधे सासो के भरपूर चोर सवा-सूर है
बाहर का sim_ard भरपूर अदर भरथा
और अदर का sim-sim dis_ard
नहीं सोता
गोदी के अंदर मर-दान()गी झाड़ते है
और गोदी में छोड़ के वापस आते है क्या
शरीरो के जले हुये ()रद की भरपूर राख
अदर के कम-रो के क()मो को भोगने आये हो
अदर के बाहर
तो की सृष्टि गोदी के अंदर को रोगो गे
सास की अपवित्रता से असुर
तुम(अदर)हारी की भरपूर कर-तू-तो मे का प-रदा
भरपूर मा-बाप से छिप सकता है
गोदी की ख़ाली आहों से नहीं
तुम कल भी बे-गाने थे
तुम आज भी भ-गाने भले हो
तुम कल भी बह(ी-खा)ने हो
अपवित्र असुर घर के अदर दिखावे के लिये
कमी-ने एक-एक के लिये भरपूर स(द)ड़के है
तुमने आधा जन्म को दुनिया के अदर-बाहर एक-बना दिखाया
दुनिया का अदर साया भरपूर सर-माया पूरा चढ़ाया
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