फिरा-कि-तरह

ज़ुबान ही घूमती रहती है


इधर-उधर भरपूर -वार की तरह


शरीर तो सस्ते सास मे सोता है -यार की तरह


फिर कहते है घर को बाहर की सैर कराके भरपूर

जगाये है अदर इकरार फिरा

भरपूर प्रापत

मनुष्य अपना प्राप्तव्य अर्थ प्रपात कर ही लेता है


और उसके लिए उसे घर को बाहर निकालना होता है


इसी लिए घर को अदर बिठाने से भरपूर प्रापत भरपूर ही होता

याद

जब सास भरी-भारी हो जाती है तो सो जाती है


ताकि उसे y-0-s in()id u का आना जाना भरपूर सपनो की तरह

हल्का लगे बद आखो के अदर का उछाल बाहर छलका-छलका छले


दिन हो रात हो कब-कहा यह-सास हो


y-0-s in()id u की आज़ादी भरपूर आ(ज़ा-या)द हो

आफ-टर

दफ(ना)तरो में तूतू क्या अकेले ही

आती है मे से मिलने


अब बचो को तो घर के अदर ही

रहना पड़ता है


हाय हाय कैसे देखेगे असुरो को

अपवित्रता झाड़ते हुये


एह लो


घर के छुपे दफतर बाहर के

आफ-टर से मैच करते है क्या

सू-राख

भरपूर सास ने अपने अदर की

अपवित्रता से गोदी में सूराख किया है

उसमे से गुजरेगी भी असुरो की अपवित्रता

फिर क्या होगा

आधा न माने

भरपूर रोगी को तूतू मे मे दुनिया का

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