आधा जन्म को नया नाम मिला
एक ही दिन मे भरपूर मैला खिला
गाठे निखरी अदर छिला
गायी गयी गिला जय जय जिला
मैने तुम्हे आ(या)गया देदी है
तूतू मै मै को बाहर डूबोने की
तो फिर अदर कौन डूब
डहा डय
आधा जन्म को नया नाम मिला
एक ही दिन मे भरपूर मैला खिला
गाठे निखरी अदर छिला
गायी गयी गिला जय जय जिला
मैने तुम्हे आ(या)गया देदी है
तूतू मै मै को बाहर डूबोने की
तो फिर अदर कौन डूब
डहा डय
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vs
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& or bla bla bla
ससुरजी की सदके सडके
ऊपर दौडे घर की vi-fi तडके
क्या पकाया भरपूर भडके
खुला हो या बद दरवाजा
ताड ते तडपे
अदर नही मौत दुखती
बाहर क्या सौत सो सकती
ससुर जी को कौन रोके
दामाद की भरपूर बकती
जुबान का एक मरद शौचालय मे नही बैठ सकता
और दूयीया मे एक जुबान को फटा फट फकता
बाप रे बरद बो()ता बकता
जू खोटा
बाहर का पाप पाप पाप
खुशी से हुया अदर मिलाप
निकरे कितने काया काप
जो न झुका बुरा बाप
झुका आप
समय भाग रहा है और
तब क्या होता जब अदर
आ गया समय का सोता
तो बैठो आयना खो चला
टोटा
मौत की भरपूर नीद सोते
सुबह को बाहर भरपूर धोते
निखरी सास अन्नजल डूबोते
मौत का साया न साढे सोटे
y ho_se is _issing a sec_et fu_l co_ner
in()id y ho-me that vic_ is
1s & 0s
li(_ar)ra_y
do-m
तुम्हारा घर चलता है भरपूर बहाने से
रोज के साढे तडके ताडने रुलाने से
समाज के बहाने अदर सास भूलाने से
लुढका शरीर इधर उधर छपकाने से
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