गिला डय

आधा जन्म को नया नाम मिला
एक ही दिन मे भरपूर मैला खिला
गाठे निखरी अदर छिला
गायी गयी गिला जय जय जिला


मैने तुम्हे आ(या)गया देदी है
तूतू मै मै को बाहर डूबोने की
तो फिर अदर कौन डूब
डहा डय

चला चल


जुबान का एक मरद शौचालय मे नही बैठ सकता
और दूयीया मे एक जुबान को फटा फट फकता
बाप रे बरद बो()ता बकता
जू खोटा


बाहर का पाप पाप पाप
खुशी से हुया अदर मिलाप
निकरे कितने काया काप
जो न झुका बुरा बाप
झुका आप


समय भाग रहा है और
तब क्या होता जब अदर
आ गया समय का सोता
तो बैठो आयना खो चला
टोटा


मौत की भरपूर नीद सोते
सुबह को बाहर भरपूर धोते
निखरी सास अन्नजल डूबोते
मौत का साया न साढे सोटे