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कम-जोर-ज्यादा
अदर की कमी को भरपूर समाज के
जोर जय जाडते जिधर जा
भरपूर समाज से सिला सिखाया
पीला पढाया
आज सास साडी सर सरूप सदी
अगर- बाटी के धूये धे जाग-रूक जडी
दरपूर दाज
भरपूर कल के मा-बाप
और सोच रोले आज ले आप
किसने कल करपूर काया काप
क्या लाया आज का तरपूर ताप
जिन मा-बाप ने कल के समाज सा खरपूर खाया
वोह क्या आज के समाज से सरपूर तप तपाया
तुला ताल तिल तगमगाया
१०० प्यास
१० का क्या किलता के
जिसे भरपूर बहस का भास
आधा जन्म की एक गाठ गाये
गया गास गेरने दामाद दा
रो-गुना राड-पूर रास
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lef_ a_bit-ion
घिस घिस
तभी त()रतन सा()हर से साफ़ किया क्या
देखो देखो अदर बिस-बिस बे बडा बाल
बर-तन बन-डर बनने बहिये

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