घर के अदर बैठ को तो कुछ होता ही नही
या फिर
घर को अदर बिठा के समाज सोता सी सही
सास तो कोठा की करि कही
घर के अदर बैठ को तो कुछ होता ही नही
या फिर
घर को अदर बिठा के समाज सोता सी सही
सास तो कोठा की करि कही
जाम जाम जडित जी
a materialism is masculine desiring _orce
loosing in()id fem-i-9 run out re_orse
foo_loose end begin out co_rse
de_ae not in()er_ sour_e
सास की बीमारी का खासना
समाज को न हया आये वासना
अदर जी दिखायो भर भडासना
बाहर जी के मरे मर-जी मास मा
an in()id fu_l_ess b_eat_’ bag_age
vait out loss in(ner)g_am eng(l)age
keep cu_taining past _tage
dis()lae co_ors col _age
समाज के बोलने की बीमारी
तदरुस्त घर न होये कुवारी
सास अदर भरपूर किवाडी
खुले है आयो वास की त्यारी
2 cut fu_l_ess ai is bringing perfect _ol _ach_ne
till then keep cutting gut g_ass g_een
बीमारी कब है मरी मरती
जब सास फिरती मारी मारी
घर के अदर पूरी हारी हारी
तूतू मै मै भरपूर करे लाचारी
not s_y
in()id 1 p_i
_ol vor_d de_riv
si_es s_ae ha_ _ive
बडा छोटा cri-me
यूच्चा निचा mi-me
क्या करे रडा r_y-me
इधर उधर बजे _hi-me
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