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आज तो बिजली चमकेगी
चकमक चकमक चाव चकेगी
चुलबुली चाल गोदी मचलेगी
१४ बरसो के रात-दिन का जन्म
गोदी के ख़ाली नाम पुन्र प्रवेश का नमन
आधि बूंद की आदि बिजली का बंधन रमन
जनम दिन(रात) मुबारक हो ख़ाली जाम अमृतम अमन
अब भरपूर तो सास में है
पूरा बेशरम और है पूरा बद()मीज़
खेंचे भरपूर कमीज़
gut गोदी का सूखा क्या करेगा
खींचेगा लकीर न लाँघ
सजे पूरा अकील ख़ाली बैठो
बूझो ख़ाली खील
y in()id u ne_er un_er-s()ood
nothing ne_er no u
राहु ने सोमरस तो निगल लिया
लेकिन गले से निचे नहीं उतरा
न ही उतरेगा किसी भी युग में
धढ़ क्या करेगा शरीरो के बगैर
तो बोलो आधे की ख़ाली खैर
आधे कही भी रहे गोदी के अंदर रावा
सारी गोदी का पता पत्ता मावा
आधे गोदी का ख़ाली बावा
gut ज़मीन उगले आधे भरपूर लावा
बस करो आधे
और नहीं वाह देह
gut गोदी को न मिला ख़ाली तेह
कौन भगाये भरपूर भय
रात-दिन न जगे ख़ाली लेह
आप ही करो ख़ाली मेह
जहां सूर्य की रौशनी नहीं
वहां है gut गोदी का अँधेरा ढूंढे
अंदर की ख़ाली रोहिणी का
सफेरा
कितने जन्मो के अंदर आधा
एक बलवान रहता है और
शुन्य जन्म में तो निर्बल ही मिलता है
शुन्य जन्म मिलता नहीं
gut गोदी के अंदर ख़ाली ढाल के
अपने आप शुन्य साँस
ढल जाता है
i _ood do
ever-y-thing in()id u
(& me)
for ha_f wit()in chi_d to
be af()aid of on half
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