तो-तुली

आधे तो gut की tot-al माँ(की)मूली है

इसी लिए गोदी की आग ख़ाली बबुली है

अंदर बाहर बोले ख़ाली आधे तो-तुली है

भीतर न समझे ख़ाली भू ति-तली है

आखे दिखाओगे तो ख़ाली की

भरपूर बिजली है

भार ढो

भरपूर से अपना भार ढो नहीं होता


और गोदी की चिंटी को दाना उठाते

देख कर प्रेरणा मिलती है


एह कौन बातयेगा चींटी की टांगे

gut गोदी का ख़ाली घर-भार उठा

के संभलके के चलती है

भरपूर को तो यह भी नहीं पास्ता

यह क्यो अदर क्या है, ढोने से पहले

इकठा करना जरूरी है

हाथ जोर

कच्चे घरो के अंदर के sq f()ame

का भगवान ma()ch करता है

बाहर के धार्मिक स्थानो के

अंदर के भगवन से

एक बात तो है

तुम्हारे अदर का तो ma()ch

करता है

इसी लिये हाथ के साथ आखे भी

जोड़ लगा के हईशा

ये चक्कर पूरा गुम गाम आता आधा को

पूरा hol करके लाता है लगता

लेकिन बुँदिया तो कभी _at()ch ही नहीं हुई

किसी भी युग के अंदर

gut मईया की अनोखी आंखे

ऐसी हे नहीं सौखी सखी