भरपूर बचे अच्छे भी नहीं बैठा सकते
ख़ाली गंदे तो gut गोदी में ख़ाली बैठे है
भरपूर बचे अच्छे भी नहीं बैठा सकते
ख़ाली गंदे तो gut गोदी में ख़ाली बैठे है
tot()ro
an in()gi-ble
n-eigh()b()hood
wa()ch
भरपूर जुबान भरपूर तोल
ख़ाली वाणी ख़ाली इधर उधर मोल
अंदर है ख़ाली चित्तचोल
a spo_n(ing-1)sor_hip is
a _not re-qui_it for wit()in
( )
(of_)c()ses _tu-dent mu_t
_ave *qu_sit s_ill
for u _it no ever-y-one
in()id u _ill _it
_ill y wei() th@ in()id
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_ow
no()thing no need
noc
no ob()ection (as)cert-if-i()c@
of _i-lent
k
बलराम का आम देखो ध्याया धाम
आधे अंदर बुलाये इत उत सारा काम
gut गोदी में रहे बूंदियो का ख़ाली नाम
सदा सदा खेले ख़ाली गुंजो गा गुरु-शाम
a qu_et brea()ing is
paeing to()tal re_pect to
emptee t-on()u in()id
sil()n’t _ung
a pre-re(*)qu_sit for
b()eath_ork is emptee _ind
&
u _odi _ind be_ind 4 sto()m-ach
emptee _ind
आज तो बिजली चमकेगी
चकमक चकमक चाव चकेगी
चुलबुली चाल गोदी मचलेगी
१४ बरसो के रात-दिन का जन्म
गोदी के ख़ाली नाम पुन्र प्रवेश का नमन
आधि बूंद की आदि बिजली का बंधन रमन
जनम दिन(रात) मुबारक हो ख़ाली जाम अमृतम अमन
अब भरपूर तो सास में है
पूरा बेशरम और है पूरा बद()मीज़
खेंचे भरपूर कमीज़
gut गोदी का सूखा क्या करेगा
खींचेगा लकीर न लाँघ
सजे पूरा अकील ख़ाली बैठो
बूझो ख़ाली खील
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