मूषक राज की स्वा()री है महा विद्या की ख़ाली आरी
धीरे धीरे गोदी मे आए ख़ाली गंध की राज दुलारी
गोदी मे सारी खिले अदभुत ध्यानी की ख़ाली क्यारी
दिखे जहा जहा वहाँ है सृष्टि मईया की गोदी प्यारी
मूषक राज की स्वा()री है महा विद्या की ख़ाली आरी
धीरे धीरे गोदी मे आए ख़ाली गंध की राज दुलारी
गोदी मे सारी खिले अदभुत ध्यानी की ख़ाली क्यारी
दिखे जहा जहा वहाँ है सृष्टि मईया की गोदी प्यारी
ख़ाली सांसो को दिखाना-सुखाना भी क्या जरूरी होता है
ल-लो लान लो
गोदी का ख़ाली ज़माना भी सारा पुराण माना ख़ाली होता है
भीतर ही बहे ख़ाली आम सारा संसार धोता है
an em()tee mother never _rings off(c)end for a c_ild is kic_in _egs in()id wom_
for y chi_d is _earning to di_ect on man’ _ol si_ _tic _ith &s un_war in()id tom_
for u _ill _ever _av total ca_aci()ti of /cep_ion to _eel wit()in c_ild kic_in wit()in _omb
o सृष्टि गोदी की मईया
ख़ाली शुन्य हो पूर्ण विवरण की वर्णमाला के ख़ाली अक्षरों का धर्मा
mae aum()tea shunea is to()tal absolute dia lit
each breath’ mandala of all em()tee realms of em()tee being
hol 1 dark_ess e*pelling in(out)id purging
within aum()tea विद्या
a शुन्य gut is to()tal em()tee 0 in(out)id a_on u
असुरो और बूंदियो के बीच में मंथन
सृष्टि गोदी का अमृत पूर्ण समर्पण
काल रात्रि है मधानी का सारा दर्पण
और आधे बैठा है निचे ध्यानी
नीलपंथ अभी हुआ अंदर का ज्ञानी
कब ख़तम हो कलयुगा की भरपूर निशानी
जिसको सृष्टि गोदी की ख़ाली चुपी का एहसास नहीं
उसे अपने अंदर की शांति के परिश्रम का ख़ाली विश्वास नहीं
a babi breath is qute
though wiw o babi is sound of aum()tea mute
be carried all along in(out)id ro_t
paus y e-mail & y ()s-m-s
for y in()id u did 1 _ol _ood
& to()tal wiw o 10 _ad
&
for a_on u _av in()id pass nothing _rite
& 4 t_en now
adhe is totallee emptee ()esting
wit()in lap of gut nature’
aum()tea wiw o _en-ses
no()thing initiated
असली ल(प)ढ़ाई तो अब होगी
आधे सांप और भरपूर निवाले की
भरपूर शरीरो तो गिरा पड़ा है
अदर की बीमा(या)रियो के मर-दो
की लाठी से
लेकिन भरपूर ज़ुबान की जवानी
तो कायम रहेगी
ख़ाली माँ को ललकारो भरपूर भरो
तथा(अ) स्तु
आधे आम
हांजी
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