आत्मा के औस की बूंदे
ढूंढे सांस की ठोस नींदे
अफ़सोस नहीं भरपूर आयना रोंदे
जाओगे कहा इधर उधर
आकाश भी है सोँधे सोँधे
आत्मा के औस की बूंदे
ढूंढे सांस की ठोस नींदे
अफ़सोस नहीं भरपूर आयना रोंदे
जाओगे कहा इधर उधर
आकाश भी है सोँधे सोँधे
ओह दिन दूर नहीं
रात का साया चूर वही
आधा हज़ूर जी नहीं
अंदर के उजियारे में
खाली साँस भरपूर एही
हमारे घर के अंदर
babi o का _tir
खेले आंख मीचि
हम जो जायेंगे फर
छुपो चाहे जहा भी
गोदी का है ख़ाली दर
जवानी का जोश है
रात भर रोंदे ज़मीन, सोये ना सुबह
बीमारियो की सास सरफरोश है
तमनआयो का चेहरा आगोश है
लेके अंदर डूबेंगे सृष्टि,
बाहर फलक ढूंढे होश है






You must be logged in to post a comment.