ओह दिन दूर नहीं
रात का साया चूर वही
आधा हज़ूर जी नहीं
अंदर के उजियारे में
खाली साँस भरपूर एही
ओह दिन दूर नहीं
रात का साया चूर वही
आधा हज़ूर जी नहीं
अंदर के उजियारे में
खाली साँस भरपूर एही
this is eternal
()alking aum(p)tea breath
now
within lap of nature
मोरनी
मैं क्यों काला
मैं क्यों काला
गोरी सौतनों को अंदर कला देख कर
डर ही नहीं लगता
सास चाहे कुछ भी सोचे दामाद अंदर
जब साँस आँखों के सामने आएगी
गोदी का तय तभी gut मईया दिखाएगी
युग के समय के अंदर
रौशनी तभी जगायेगी
आधे आम भी भायेगी
mama boonda ()now
no one can put a ()ace on adhe’
mae u
हमारे घर के अंदर
babi o का _tir
खेले आंख मीचि
हम जो जायेंगे फर
छुपो चाहे जहा भी
गोदी का है ख़ाली दर




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