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बलराम का आम देखो ध्याया धाम
आधे अंदर बुलाये इत उत सारा काम
gut गोदी में रहे बूंदियो का ख़ाली नाम
सदा सदा खेले ख़ाली गुंजो गा गुरु-शाम
a qu_et brea()ing is
paeing to()tal re_pect to
emptee t-on()u in()id
sil()n’t _ung
a pre-re(*)qu_sit for
b()eath_ork is emptee _ind
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u _odi _ind be_ind 4 sto()m-ach
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आज तो बिजली चमकेगी
चकमक चकमक चाव चकेगी
चुलबुली चाल गोदी मचलेगी
१४ बरसो के रात-दिन का जन्म
गोदी के ख़ाली नाम पुन्र प्रवेश का नमन
आधि बूंद की आदि बिजली का बंधन रमन
जनम दिन(रात) मुबारक हो ख़ाली जाम अमृतम अमन
आधे कही भी रहे गोदी के अंदर रावा
सारी गोदी का पता पत्ता मावा
आधे गोदी का ख़ाली बावा
gut ज़मीन उगले आधे भरपूर लावा
बस करो आधे
और नहीं वाह देह
gut गोदी को न मिला ख़ाली तेह
कौन भगाये भरपूर भय
रात-दिन न जगे ख़ाली लेह
आप ही करो ख़ाली मेह
जहां सूर्य की रौशनी नहीं
वहां है gut गोदी का अँधेरा ढूंढे
अंदर की ख़ाली रोहिणी का
सफेरा
कितने जन्मो के अंदर आधा
एक बलवान रहता है और
शुन्य जन्म में तो निर्बल ही मिलता है
शुन्य जन्म मिलता नहीं
gut गोदी के अंदर ख़ाली ढाल के
अपने आप शुन्य साँस
ढल जाता है
बलगाडी के पहीये बल का पीछा करते है
आधा ने ही तो बनायी थी
क्यों युग में कल
आज के
बैल के सींघ को भी नहीं छोड़ा
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