अदर बाहर ढलते

आज को अंदर गोदी का अच्छा-बुरा

सारा पता है ख़ाली बूंदिया ख़ाली

घरो में कुसकती नहीं है और

सास के दामाद को मर्द की ईंट मारनी है

अपने घर को अदर बाहर ढलते