गोदी का साया है ख़ाली भाया न जाने भरपूर ज़ुबान
की भरपूर आखे खोलने का किराया
देना पड़ेगा आज का अंदर का भरपूर सरमाया
माया न देखे सर हो या धढ़ गिराया
गला दबा के न मचलो भरपूर भाया
निवाले का जहर न गले ने कहर बाहर मचाया
गोदी का साया है ख़ाली भाया न जाने भरपूर ज़ुबान
की भरपूर आखे खोलने का किराया
देना पड़ेगा आज का अंदर का भरपूर सरमाया
माया न देखे सर हो या धढ़ गिराया
गला दबा के न मचलो भरपूर भाया
निवाले का जहर न गले ने कहर बाहर मचाया
भरपूर आधा अपने अंदर के ख़ाली आधे
का भरपूर दु(हाई)मन दश दश है
इसे गोदी के फाटक से फटाक लातके लगेंगे
तभी भरपूर भूत अंदर के फाटक
ख़ाली पटकेंगे
जब ख़ाली डंडे ही असुरो के भरपूर का
कुछ बिगाड़ नहीं सकते तो
ख़ाली आधा तो गोदी में डूबा हुआ है
तैरना नहीं आता
आधे को तो एह भी नहीं पता
बूंदियो की सा(हा)या(आ)ता होती है
gut गोदी में पता नहीं
कहां बहती है बूंदिया
आज को अंदर गोदी का अच्छा-बुरा
सारा पता है ख़ाली बूंदिया ख़ाली
घरो में कुसकती नहीं है और
सास के दामाद को मर्द की ईंट मारनी है
अपने घर को अदर बाहर ढलते
ख़ाली डंडे s_oon emptee
भरपूर _eeding
un()one every1
_eeding
gut गोदी का नमक तुम-हारे
शहर का ज़हर हो गया जो तुम-टारे
जख्मो पे भरपूर छिड़कता है
भरपूर को g(ut)olden s_oon _eeding चाहिए
wit()out in()id _il-ver भरपूर
_oon _ac()if-icing भरपूर
ever-y-thing फितूर _ooting
gut nature godi’
no()thing नूर
ever–thing भरपूर is t()mp(or)ar-y
&
nothing em_tee is /man()nt
an aum()tea af(in)finiti is
gut alone mother nature & em_tee within child
within _ap of nature
re_t are un()not _esting
t_en _esting each other
भरपूर _esting
an em_tee silence is not
li_10ing ever–thing
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