बूह बाते बक

मितने मूह मिटने माते
खितने खूह खिटने खाते
लितने लय लिटने लाते


तुम तो हमेश ही रहोगे गोदी के नत-मस्तक
तो क्या घर के भरपूर अदर एक-एक डरोगे
गोदी के इंसान की ख़ाली दस्तक


सोते जागते y-0-s in()id u के मरोड़ घर के अदर भरपूर हथोड़े दौड़

कायदा खुपड़े

आधे ख़ाली खमय खान खक खी खहि
खितने खरे खतरे खुपड़े


भरपूर भलयुग भय भसुर भपडे


बस-बस अब नहीं है भरपूर सास का फायदा
गोदी के अंदर है ख़ाली काली कमय कायदा

ह(र)जार

काल्कि का अंदर ख़ाली अवतार


gut मे प्रलय की लय का उप-चार


पुराणों मे न दिखा लिखावट का ख़ाली नार


सांसे ख़ाली अंदर अनंत आर-पर


ख़ाली घर अखंड भीतर आधार


ख़ाली टेक धरो दिव्यां-ज्योति के ह(र)जार

छी छोर सवा


ि छदा छोर छत-वाले छांटे
ख़ाली खोर खाट खाटे
दारू दौर दनदर दते
हिस्की हट हरपूर हटे हाँटे


कितने सवाल सास के सवा लाल
अदर ही भरपूर एक बाल
तो क्या _urg करने भी एक आधा साल
किसे बताते अदर भरपूर भाल

ख़ाली खंडे

आधे ख़ाली शैईया उठाने के कंधे नहीं है दुनिया के नेक बन्दे
बूंदिया ही लाए ख़ाली खंधे ख़ाली हो रुख्सत रहे राद द्रोण दे दंदे

ख़ाली रखने से गोदी गोत ख़ाली गति गा

माड़े क()मो को खरीदी बीमायारीयो की भरपूर कमायी दाता कोई सास अदर

जैसी अदर मोड़नी वैसी बाहर निचोड़नी
कहा है बिगड़ी होई भरपूर तोड़नी

विद्या-मथानी

श्री धन्वंतरि जी की विद्या-म()धानी को भरपूर बेचा और बिच-वायो


तभी तो इतनी बरकत बीमा(या)रियो के सवा()लो की बनायी और बनायो


विद्या तो खभी गहरी नहीं खो खक्ति खायो और खवायो


तो gut के तल के ऊपर ही भरपूर दामाद उडायो


सास तो भहरी ही भोती भरपूर भतायो


लुढ़क लुढ़क लरपूर लात लतायो

-वा(कम)ायी

सास की भरपूर आखो को म()दरमा घटता बढ़ता नज़र आता है
यह नहीं पता गोदी में एक-एक सूर्य भी एही करता है आधा दिन के अंदर


तुमहारी दवा की भरपूर आयी तो सास को gut के अदर गला नही सकती
तो क्या दवा को red भरपूर gala _ut करेगी
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बाहर भरपूर कामो के लिये उत्सुकता से उकसाते है
और अदर बचो की भरपूर वाट लगाते है
बेटा हम भी ऐसे ही पले बड़े है
भरपूर घर तो ऐसे ही एक भले भै
ख़ाली घर में क्या दीवारों से भरपूर सर फिरोयोगे
सास के अदर एक एक कैसे अड़ा-योगे

सुर-सागर मंथन

गोदी के अमृत के लिए


असुरो और सुरो के बीच में सुर-आ()गर मंथन


सुरो के हाथ है केतु की पूँछ (नहीं होगी सफ़ेद मूंछ) और असुरो के पास राहु की धड़

(आगे से पकड़ पीछे है जकड)


तभी तो जब-अब देखो


तूतू मे मे दुनिया का एक दिन तू खुद ही

सास की धड़ ख़रीदेगा या खरोंदेगा


अपवित्र असुर

घर के अदर ही सास रौदेगा