जाती जा – सटटा सा

अब आधे

आज की सास सो स्या ()हेगा

सास के चनदर चो चाथ ची चलती चा


पर हाँ g(ut)round तो गोदी की जिम्मेजारी जा

बीमा(या)रिया जो जारी जाम जनता -ती-जाती जा

पलायन अदर भरना सीख सो सती सटटा सा

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यू आल

क्युकी 2 काल्कि

आधे है काल की सारी ख़ाली छईया

तुम आके अपनी मे ढूढो भरपूर बईया

mir(or-a)cle की चाहिए दईयां


गोदी का गमल तो ख़ाली कीचड में ही खिलता

गांठ गड़े गढ़ों गा गईयां

पटा पल

कहते है ऊपर वाले की मर-जी के बगैर पत्ता पही पलता

(मर-जी ऊपर भरपूर होती है अंदर तक आते आते
ख़ाली हो जाती है स्ट्रेटोस्फियर में पलायन की आग से)


ऊपर वाले के पास पल नहीं होता या अंदर वाले के साथ _@chi मारता
पत्ते तो गोदी में पवन पुत्र की मर्जी से उड़ते उ


इसका बल मत यह है की सास के अदर का एक-एक पटा पूरा पल्टा


हाजमोला से मोला नहीं आधे का खड़पुर खड़ा खडगोला गोल खारा खोला

ख़ाली अईया

सृष्टि मईया की गोदी में हमारे सोने की नईया

नदी तैरती ताए घर का ख़ाली खिवईया

नौका सांसो की भीतर ख़ाली सहज सिवईयां

अंतर्लीन अंदर आँखे विभोर ख़ाली अईया

साद मे

जब आधा सास की अदर भरपूर भ()ददा की भरपूर ये()मियत है दुनिया के एक एक मे

तो आधे की ख़ाली बाधा की क्या ख़ाली न()सीयत गोदी मे


यह तो तु()हारा भगवन भी न जाने सीधे सास के सादे मे

आ-हा

हम(आ)रा आधे गोदी का सुर रखवाली ख़ाली माली खिलेगा
तुम-हारा आधा अपवित्र असुर भरपूर सास के अदर भिड़ेगा


गोदी के दिन रात का अपमान करने की तुम्हे कोई सजा नहीं मिलती
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मुहूर्त ख़ाली

ख़ाली मुहूर्त हेख खे खलियुग खा दिन दायां


आधे ख़ाली गिन गिन अंदर बाँवरी बायां


रात भरपूर रू-गले दिनरैन ख़ाली दिलाया


आधे ही अड़ा ते अड़ाया ख़ाली खाया