खै-रात की -तां

आधे को सृष्टि गोदी क्या खैर खी खै-रात की बातां में मिली है जो


तूतू मे मे दुनिया के एक-एक भरपूर भाटा के ज्वर जाचेगा और

भरपूर नको को ख़ाली नाट्य नचायेगा

घर के अदर भरपूर मेहनत नहीं माती तो इसमें किसी

एक को एक ही क्या पायेगा

सानु की

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जो पा()या अदर दि ग्वाया

जिस भरपूर जानकारी को पाकर तुमने हमें भूला दिया
ओह तो है सास के दामाद के एक-ज़ुबान की जान की भरपूर कारी
क्या टोड़ायेगी अदर भरपूर मल-भारी
पर तुम यह नहीं भूल सकते अंदर आ त्यारी
हमें सोना है हमें खाना है हमें गोदी में खेलना है
गोदी में है हम-आरी

हम तुम-हारे आज के आ(औ)भारी अहि आ
उचित गोदी जो अंदर ठीक समझे वही है संत()लन की ख़ाली ख़याली

गोदी को-ख

सृष्टि गोदी की कोख में आधे अभी लाते तारनी तीख तहा ता


हाँ गोदी कोख ख़ाली आधे बाहर नहीं निका(ह)लेगी


ख़ाली सीख सही सा आधे जमन जही जोगा

ख़ाली खोज्या ख़याली खोला