अब सृष्टि गोदी में मईया ने खुद बाल शुनया बिंदु
को माखन खाने खो खिला ख़हे खा
तो भरपूर भ()ल-ज़ाम तो सास की तूतू मे मे ने
अपना भरपूर सिद्ध करने के लिए लगाए ला
अब इस सास सो सदगे इधर-उधर के ख़ाली डंडे
ना भूले भाली भेहेर अदर-बाहर भरपूर भंडे
अब सृष्टि गोदी में मईया ने खुद बाल शुनया बिंदु
को माखन खाने खो खिला ख़हे खा
तो भरपूर भ()ल-ज़ाम तो सास की तूतू मे मे ने
अपना भरपूर सिद्ध करने के लिए लगाए ला
अब इस सास सो सदगे इधर-उधर के ख़ाली डंडे
ना भूले भाली भेहेर अदर-बाहर भरपूर भंडे
गोदी के काल्कि को है ना इंतज़ार
सृष्टि की कोख का ख़ाली खल कख-वार
तुम-हारे अदर भरपूर त्रिकाल का अंत-कार
ना लौटाए अंदर तरपूर तरो ताली ताल तार
नही आया य-कीन भरपूर भहाली बे-हाल ब-हार
अकलिष्ठा-कलिष्टा
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वैराग्य ख़ाली वही वि-योग अदर भरपूर भाग्य
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गोदी में अंनगिणत अन्न-गणित ख़ाली आधे
सृष्टि की कल्पना कागे ख़ाली खागे
अनंन्त में लींन आरे-वारे न्यारे नागे
ख़ाली ध्वनि धे धींन धन्धु धा धागे
काल्कि आधे बिंदु द्वार दहि दौड़ा दायाँ
आधे बिंदु आमने सारा दिन आज ख़ाली खाया
ख़ाली माँ का रात काला आधा सामने साया
आँखों में खूह खुला खंड खरपूर खमाया
सारथी सा साथ सखाया ख़ाली समाया
पढ़ाई का बल मत पढ़()आई
और सास का दामाद कहा गया है धरने
i को बाहर खरीदने खैर खाते
भरपूर भक भर अदर भय-लाते
एक-एक ना समझ बाहर बाते
पूरे पैर पड़े ना इधर उधर प()ते
परपूर पढ़ पिगला गला गाते
o_ening an em_tee _lack u_b_ella in()id _ill _ring
y-0-s _ad _uck th@ s_a-y-s ne_er _uch
for()ver u in()id _uch
is y lea()ning _as no wit_in tu()ning
_h@ do()s th@ _ook _ik in()id chu()ning
le_arning urning
जब सास के दामाद अदर नही दफा
तो दिखावा का भरपूर मुखौटा बाहर खफा
किसने वेखा ऐसा भरपूर भोटा भफा और सोटा सफा
रिसकी राद में दिन रात ख़ाली खोए
वही सांसो के ख़ाली आँसू पिरोए
ख़ाली बंधन बांध भीतर भिगोए
साँस भी तैरे सारे असीस सोए
ख़ाली जोत गोदी की बहार बोए
ख़ाली प्रेम के नितनेम से y-0-s in()id u के अजनबी अंदर आते आ
तू तोड़ के तो तिखा ख़ाली द(घ)र का दरवाजा
डर डही डा डोर डागे तुझे तो अदर भी न मिले सज़ा सरपूर सगे
आधे ब्रह्माण्ड की gut()गोदी के ख़ाली घर में रहता रा
जिसके अंदर के रबल()बी बही बांके (न) बाँट
बाल बी ख़ाली दायां अंदर छांट
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