क्षमा -याद

क्षमा मांगने मे माँ-बच्चे का क्ष बचता मा-बा

सृष्टि गोदी की माँ क्या लगती है तुम-हारी

जब भरपूर मा ने तुम्हे कोई सजा नही दी घरपूर घर को दुनिया की रजा भा-रायी
(मा-बा की आखो को तो सामने-आमने ना नज़र आया तूतू मे मे का भाया)
जो अपने एक को दुनिया मे ऊपर चढ़ाने के लिए कितने को निचे गिराती गा
धर-मो की बटी फ़रियाद ना धिक्कारे अदर एक बरपूर बुनियाद

गोदी से गफा

घर के अदर इधर-उधर की लड़ायी
एक देश के अदर-बाहर की पूरी पढ़ायी
भू के लेखे में असुरो की ज़मीन की ऊंचाई
न मापी किसी ने अपनी जुबान जी तूतू मे मे भरपूर तुरायी
किसी को न भनक सास के दामाद के
भरपूर भाड़ भी भगदड़ बिंदी बी बिदायी

भरपूर भुर्गति

श्री कल्कि की मईया की गोदी को

तुम-हा-री तूतू मे मे की दुनिया के एक-एक ने

दरपूर दुर्गत दा()याँ दहशत दम-हार दिया

इसका सारा सार न चूका-पा-येगा

भरपूर भसर भोड़ता भमय भा भाड़ भैया

_ime_in

र के हम राही डा()ली रहम
भो भनाये भरपूर भ्रम
भही भगाये भन-दर भे-यम
घर के अदर पूरा बेरहम
बही बगाना अदर का क()म
न ढूढे सास का क्रिया क्रम

u _an _eep bi_t_ing in-if-i-n_te आधा जन्म in()id
each सास t_ough u _ill ne_er _ease
one in()id u बेरहम

मै शक्ति एक महान

कितनी आसानी से कुचल कटे एक-दूसरे के न()चलते नाते
और अपने अदर की भरपूर भूरजा भय भू-चल बही बकते
तूतू मे मे की अदर की भरपूर बाते एक दुनिया मे उड़ाते
किस-किस की हवा को गन्दा गरते गरपूर गिधर-गूधर गाते
इसी लिए तो एक-एक जन्मे अदर के भरपूर भाते

बिना कुचले तो तुम आखे भी नही खोल सकते
दरपूर दरवाजे दहाड़ दरो दिन दिहाड़े राते
मुजले मुखोटो मे मोल मोड़ मरपूर मक्ते

गोदी का सारा किसाब-हिताब बायां-दायां दाते
ख़ाली लाज्वाब ज-लियायो भरपूर नवाब नाते

वि-सर्जन

अब भगवन भो भरपूर भूर भयालू भा
सास सा सर्जन सरपूर सु()रशन सा
आधा जनम का आना-जाना पूरा पति एक परखन खा
क्या करे मईया की गोदी में सृष्टि का दाना-पाना
ख़ाली द्वारे ढके ढाक ढा