ब्रह्माण्ड बारी बाली बांखे
गोदी(कोख) की ज़मीन की राखे
दिन रात करे ख़ाली खाखे
अंदर ()तरे निरा(आ)ली आँखे
ब्रह्माण्ड बारी बाली बांखे
गोदी(कोख) की ज़मीन की राखे
दिन रात करे ख़ाली खाखे
अंदर ()तरे निरा(आ)ली आँखे
रा के केस ढूंढें मत-मल मि()नी
देख तो जरा आंख अंदर ज्ञानी
कट कट काल कारा कमानी
शब्द शांति शत शय्या शानि
बरे बहावे धरोहर धार ध्यानी
कल यिस ()यार की ()याति-र घर के अदर के ()लरो को लड़ा लिया
आज सास की बी()यारियो की काट कडपूर कुचले
ख़ाली खु()लो खी खु()दियाँ
कलयुग के ()रो की तरपूर तरक्की
ता ताके न नाते
द्वापर दे दवारो दे ख़ाली आधा-आधे की ()क्की
an age of pi_ces2aqu_r_us
hous vs hom
गोदी के ख़ाली न( ा)ज़ारे लूटती
आखे विष_ull भरपूर भूख फूटती
हा थोड़ा थोड़ा ले कब्जे हथौडा
तू तेरी तान तत्र तदर मे तोडा
दुनिया के बाया ()गल मे क्यो कही मे द-गल मिया
धड धड दगा दखेड़ा दूर दा दीछा दिया
हमने तो यही है आज पाया
गोदी का भीतर ख़ाली खाया
अपनो ने पूरा आधा दिखाया
गले में आधे दरा दबाया
तुमने दहरा दाज गवाया
इधर उधर आधा भिखाया
अदर बहार एक बूढ़ा बढ़ाया
गाठो गा गढ़ गट गे गिठाया

बिंदी बीचे
आँखे मीचें
ऊपर नीचे सींचे
इधर-उधर भाली भीगे
अँदर काल कारा कींचे
दुनिया के एक-एक असुर ने ही सूखा सिला सा
गोदी के माँ-बच्चे के सुरो सी ख़ाली खिल-ख्या()रियाँ
अब आना अहा आ
_ai_ing _ead chil_r()n’
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हम तो आज ही आरे-नारे
तुम-हारे हिटने हारे-वारे
sun_ise yo_a _@c_es _ir in()id _un_et भोga
1 un_verse गोदी से मैच महि मड़ता
भरपूर भ()दा भूडा भास सास सा सरीर
कैसे किठाये क्यो नही क()न का ()कीर
0_ing vs ever-y-t_ing
हम-आरा अनुभव कभी तुम-हारो के भाव से सच सही सड़ता
तुम-हारो के नर का तन कौन साफ़ सड़ता
दुनिया की एक शाति आयी कहती क्यो कही कडता
क्यो के कितने कास कड़े को
अदर गी गडपूर ग()मी गी गोलता
गोदी में to()al he@ _ave से क्या कोगा
क्यो कही काडा किया ()कोर
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