i am th@ w_ich is _ast no()thing
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eie aum th@ _hich is 0_ing now em_tee
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0 em_tee will an-no(y)thing ever-y1-t_ing
i am th@ w_ich is _ast no()thing
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eie aum th@ _hich is 0_ing now em_tee
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0 em_tee will an-no(y)thing ever-y1-t_ing
a wit_in _ap of nature’ no pr()s_ence
0 bo_h_r(_tom)ing u 0 _ess
_ick y
0 ( ) wa_ch_
घर के अदर इधर-उधर की लड़ायी
एक देश के अदर-बाहर की पूरी पढ़ायी
भू के लेखे में असुरो की ज़मीन की ऊंचाई
न मापी किसी ने अपनी जुबान जी तूतू मे मे भरपूर तुरायी
किसी को न भनक सास के दामाद के
भरपूर भाड़ भी भगदड़ बिंदी बी बिदायी
no()thing is to()tal p_i-or-it-ee
0 u _av y-0-s in()id u _hai_ty
_h@ an in()id u _orm
y-0-s _ol hu(e)man 0 de_orm
()i-ew out()id _ol _orm
0_ing is eve_o_d predi_t-a-ble
y-0-s in()id u _it 0 _eet do_ble
श्री कल्कि की मईया की गोदी को
तुम-हा-री तूतू मे मे की दुनिया के एक-एक ने
दरपूर दुर्गत दा()याँ दहशत दम-हार दिया
इसका सारा सार न चूका-पा-येगा
भरपूर भसर भोड़ता भमय भा भाड़ भैया
र के हम राही डा()ली रहम
भो भनाये भरपूर भ्रम
भही भगाये भन-दर भे-यम
घर के अदर पूरा बेरहम
बही बगाना अदर का क()म
न ढूढे सास का क्रिया क्रम
u _an _eep bi_t_ing in-if-i-n_te आधा जन्म in()id
each सास t_ough u _ill ne_er _ease
one in()id u बेरहम
कितनी आसानी से कुचल कटे एक-दूसरे के न()चलते नाते
और अपने अदर की भरपूर भूरजा भय भू-चल बही बकते
तूतू मे मे की अदर की भरपूर बाते एक दुनिया मे उड़ाते
किस-किस की हवा को गन्दा गरते गरपूर गिधर-गूधर गाते
इसी लिए तो एक-एक जन्मे अदर के भरपूर भाते
बिना कुचले तो तुम आखे भी नही खोल सकते
दरपूर दरवाजे दहाड़ दरो दिन दिहाड़े राते
मुजले मुखोटो मे मोल मोड़ मरपूर मक्ते
गोदी का सारा किसाब-हिताब बायां-दायां दाते
ख़ाली लाज्वाब ज-लियायो भरपूर नवाब नाते
अब भगवन भो भरपूर भूर भयालू भा
सास सा सर्जन सरपूर सु()रशन सा
आधा जनम का आना-जाना पूरा पति एक परखन खा
क्या करे मईया की गोदी में सृष्टि का दाना-पाना
ख़ाली द्वारे ढके ढाक ढा
सृष्टि गोदी _eed to()tal c_an_e
in()id on wor_d ___ange
0 even 1 as()ur _ol _f_y o_d _ange
सृष्टि गोदी की आँखों में नैठ नहीं नकते
और आधे के आ(सा)मने गोदी में
भरपूर असुर दूरी दूर(घाव)गध दरते दा
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