श्री कल्कि की मईया की गोदी को
तुम-हा-री तूतू मे मे की दुनिया के एक-एक ने
दरपूर दुर्गत दा()याँ दहशत दम-हार दिया
इसका सारा सार न चूका-पा-येगा
भरपूर भसर भोड़ता भमय भा भाड़ भैया
श्री कल्कि की मईया की गोदी को
तुम-हा-री तूतू मे मे की दुनिया के एक-एक ने
दरपूर दुर्गत दा()याँ दहशत दम-हार दिया
इसका सारा सार न चूका-पा-येगा
भरपूर भसर भोड़ता भमय भा भाड़ भैया