ख़ाली सांसे

सृष्टि गोदी की ख़ाली ज़मीन में

आत्मा(तत्व)शक्ति की जरूरत ख़ाली सांसे

अंदर-बाहर धहलती धारे ख़ाली झांसे

इधर-उधर अटकाए ख़ाली फाँसे

टेक टिकाएं दाएं-बाएं ख़ाली दिलासे

ख़ाली खठ खठ

०५=५०

ख़ाली चठ-बठ

ख़ाली आधा जन्म सृष्टि गोदी के अंदर दिन आधे अंदर रात

ख़ाली साँस n()w to()al आधे अठ अट अट

० नव-शिशु ५ इन्द्रियाँ _ut गोदी ख़ाली खट खट

काल के ख़ाली पुतले काला-काली कुल कठ कट कट

आँगन में बलाएँ बूंदियो की बठ बट बट

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भगवन को दुनिया के एक नेक के अदर की भरपूर बत्तिया बहुत भाती भा

गोदी का अँधेरा तो ख़ाली खलता भूर भागता भग भग

क्षमा -याद

क्षमा मांगने मे माँ-बच्चे का क्ष बचता मा-बा

सृष्टि गोदी की माँ क्या लगती है तुम-हारी

जब भरपूर मा ने तुम्हे कोई सजा नही दी घरपूर घर को दुनिया की रजा भा-रायी
(मा-बा की आखो को तो सामने-आमने ना नज़र आया तूतू मे मे का भाया)
जो अपने एक को दुनिया मे ऊपर चढ़ाने के लिए कितने को निचे गिराती गा
धर-मो की बटी फ़रियाद ना धिक्कारे अदर एक बरपूर बुनियाद