भ()हाये

हमारी बिंदी सासे छीन छेती छा छत छे छुड़ानी छुया-छूत छडे छा
येसे ही तो ज़िन्दगी की बहार इधर-उधर भरपूर भसीन भरती भा


y-0-s ने ज़िन्दगी को जीत जरपूर जिया और अदर
तुम-हारी गरपूर गाठो गा तूतू तागा तिया

सासो के ज़माने का दिन-रात से सरपूर सनेहा लेना-देना
न लोटाये भरपूर बहाने बा भिखाना भहाये

-खा

ब्रह्माण्ड की आँखों ने देखा ज़मीन का भरपूर लेखा

जान्दरी ज़मीन जुड़े जिन्द्रियो जा जेखा

खू()ली ज़मीन खुला आसमान खेखा

भरपूर भुलेखा भूला भात भात -खा