ख़ाली सांसो की-म()-की का एहसास
कैसे आए अंदर ख़ाली रास
माली मटकी महा()पवास
ख़ाली सांसो की-म()-की का एहसास
कैसे आए अंदर ख़ाली रास
माली मटकी महा()पवास
हम आभारी
अभी-आरी, आभा-आरी, आओ-भारी
अहि गोदी के गहरे ग()म ग()म गच्छामि
आधे शब्दों को ख़ाली सफे से सिखता सा साकि
सफ़ेद सफा सिखाए सो साफ़ सुलाए
गोदी सुंदर सुहाए
_es i am c_osed min_
0 _et an-y1 s_ae _lose be_ind
for 1 fr_e _eep ad_ing 0 _ind
_ar u 0 _lose
or
_ar u in()id close_
आधे अपने अंदर आरा
हर युग में आधे
धूनी धन धाँसू धराहा धारा
हम तो बे()लब पत पा पान पकने पही पाते
फिर यह नाक बिना के कौन क्या किया काते
छोरी छथनी छा छल्ला तार ता तल तल्ला
0 rem_n_er th@
an_t_ing b_rn _ill
even_u-ally _ie
in()id o_d _ir 0 _y
सप्तऋषियों ने त्याग दिया था भोलेनाथ का दिया सारा ज्ञान
असुर १-१ को स()भाल से सखे सा
भरपूर उत्पादन सास-कर कलयुग के अदर
कर कुकता क्या का
आधे को पैदा अंदर करने का दुःख
और अंदर मारने का सुख
आधा सास भरपूर भूख
घर के अदर है हसना मना
इसी लिये बाहर हसना योग
गोदी की ख़ाली जागरूकता
को रोके जडपूर जा जना
You must be logged in to post a comment.