१४ को १५ बिजलियाँ गिरकी
गितनी गाथा गौरी गस गमकी
आम ओहले अंदर रंग रमकी
Category: innate
मन डालो लिट
स()य तुरंत
एक अंत एकांत का संत
0_*tra_ook
सास की 0-book के अदर क्या है
भरपूर _ag के अदर क्या है
_l-ach lin के अदर क्या है
min_fu_l s_ad-o()s के अदर क्या है
भरपूर me_do_s के अदर क्या है
…………………………………..
do__ed _in के अंदर साफ़ लिखा
क्या है
un_non i_ch
भरपूर आधा ने ख़ाली आधे की
_arn@ion पे भरपूर _cra(pi)tch मरे
हाथा(4)पायी सास सिलायो
क्या काये
आधे एह क्या किया
जू जाल जाडनी थी
बाल बिकाल बया
कही किरा क्या
नजर नही नहाये
गुन-गुने
खै-रात खले खाल पल पले
रात उ-गले रूब-रु रले
दिन दोगुने दो दवार दले
कौन रु रहर आम मन मिले
आदि आली
आधा काली आधे निराली
प्रदान-आदान ख़ाली खवाली
ड()डू
आधे लद्दू लाल लाया
आधा निगला नाड ना()या
बाहर इधर पछ-ताया
अदर उधर पच-काया
त-रैड तूती तय तलाया
ओछा अचा
गोदी में
ख़ाली और भरपूर की
पूछ नीच नही नाम नाती
ख़ाली खल खहि खकता
भरपूर बल बही बकता

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