देवी के आधे की गुफा की धूल मिट्टी का कण कण
चाफ चौंकती ची चीवारे चुन चुन
Category: innate
म(हा-पा)प
सास के अनुभव की गहरायी मापने का स्वा()लाल तो भरपूर ही बहता
साँसो की ख़ाली गहराई नहीं मापते
गोदी की ख़ाली खाई से करपूर कांपते
कल-युग कागी काली
आधा जन्म का एक मरी हुयी मौत को लेके जाता
तो क्या जगी हुई मौत को लेके आएँगे
आधा जन्म के दो-बारा अंदर
बुलायो बाम
आधे ख़ाली आधा घर के भरपूर असुर
आधे स्माधि में रुकावटे डाल रहे है
कहा है आधा आम
गोदी के वानरों के ऐनके इक्कठी
की हुई काठी पे आ रहे है
आज तो नहीं पहुँच पाएंगे
त्रेता का आज कलयुग के
कल में कैसे पहुँचेगा
before lore
roo_ sound
__ll-able sur_ound
wor_ go roun_
& utter-uns boun_
अनु()यो की मति
सब को यही सन्मति देता भगवन
सारा दिन तेरा मेरा
रात कहा रह गयी
यहा मेरी अनु-मति के बगैर कोई आ नही सकता
इसका बल मत
कंस का भरपूर घर अदर-बाहर आने की
आज़ादी ख़ाली कस को नही दे सकता
फिर यह मेरी(मेरा) किसकी मति से
दुयिया के समाज की तूतू मै मै मे खडा
no 1
मौत के मूह मे जो गया अदर वोह बाहर कहा निकला
तो लड़ते रहो दुयिया के समाज की तूतू मै मै
के भगोड़ो भरपूर भाया पिटला
दुयिया के समाज की तूतू मै मै का मूह कहा होता है
जन्म/मरन का मुँह gut ब्रह्माण्ड की ख़ाली सृष्टि की गोदी
किसका क्या नाता छूटा किसका भरपूर भूट्टा
आखे खुली आखे बद एक फिसला फूटा
गया गज गज ग्वाला
कंस के काले(वार)नामे कौन समझे ढाला
आज का कलयुग न निगलने ले
आधे अंदर शांति(निवा)शाला
भरपूर विष-वा प्याला
&
शांति(आधे )शाला
शांति(आधे )शाला
शांति(आधे )शाला
दो दरो
हम-आरे पास साँसे नहीं है भरपूर खराब करने के लिए
सास को तो दुयिया के समाज की तूतू मै मै की ही
खुशबू घर के अदर चाहिये
घड़ि(हरि)आली
गले में गोदी गी घड़िआल की घण्टी नहीं बांधते
ताकि गोदी की साँस सी आँख खुले पता पा पलटे
बायी बायी
गोदी के अदर सास ने जुबान की जू उडायी
आधा जन्म के करपूर कीटानु कान काट कडायी
ले सास अब तेरी तरपूर तदर तवायी
तेरे तो ती तली तेरी ताटी

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