गोदी के ख़ाली न( ा)ज़ारे लूटती
आखे विष_ull भरपूर भूख फूटती
हा थोड़ा थोड़ा ले कब्जे हथौडा
तू तेरी तान तत्र तदर मे तोडा
दुनिया के बाया ()गल मे क्यो कही मे द-गल मिया
धड धड दगा दखेड़ा दूर दा दीछा दिया
गोदी के ख़ाली न( ा)ज़ारे लूटती
आखे विष_ull भरपूर भूख फूटती
हा थोड़ा थोड़ा ले कब्जे हथौडा
तू तेरी तान तत्र तदर मे तोडा
दुनिया के बाया ()गल मे क्यो कही मे द-गल मिया
धड धड दगा दखेड़ा दूर दा दीछा दिया
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ਘਰ ਦੇ ਅਦਰ ਦਾਗ ਦਫ਼ਾ ਦਾਰੂ ਦੀ ਦੋਦੇ
ਬਾਹਰ _us-y ਆ ਬੜਪੂਰ ਬੇਹੜੇ ਬਹਾਨ ਬੋਗਦੇ
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हमने तो यही है आज पाया
गोदी का भीतर ख़ाली खाया
अपनो ने पूरा आधा दिखाया
गले में आधे दरा दबाया
तुमने दहरा दाज गवाया
इधर उधर आधा भिखाया
अदर बहार एक बूढ़ा बढ़ाया
गाठो गा गढ़ गट गे गिठाया
दुनिया के एक-एक असुर ने ही सूखा सिला सा
गोदी के माँ-बच्चे के सुरो सी ख़ाली खिल-ख्या()रियाँ
अब आना अहा आ
_ai_ing _ead chil_r()n’
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हम तो आज ही आरे-नारे
तुम-हारे हिटने हारे-वारे
सासो सा ()हाज वाता की वडपूर वृत्ति से ड()म-गाता गा
किसको को साथ स()नावे स्यू सही सेके से
असुरो के ()र-दार
सोच सो सोच साढे
जूठे ज()त जड ()जाडे
i am 0 _ur w_ere it _rigi()nated
_id it l& on y ton_u ti2()lated
_ow
sun_ise yo_a _@c_es _ir in()id _un_et भोga
1 un_verse गोदी से मैच महि मड़ता
भरपूर भ()दा भूडा भास सास सा सरीर
कैसे किठाये क्यो नही क()न का ()कीर
0_ing vs ever-y-t_ing
हम-आरा अनुभव कभी तुम-हारो के भाव से सच सही सड़ता
तुम-हारो के नर का तन कौन साफ़ सड़ता
दुनिया की एक शाति आयी कहती क्यो कही कडता
क्यो के कितने कास कड़े को
अदर गी गडपूर ग()मी गी गोलता
गोदी में to()al he@ _ave से क्या कोगा
क्यो कही काडा किया ()कोर
u _ar 0 a_on
is th@ 0 p_on
re_li_y is u s_on
ri_ 1 0 c_on
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