तुम कल भी बे-गाने थे
तुम आज भी भ-गाने भले हो
तुम कल भी बह(ी-खा)ने हो
अपवित्र असुर घर के अदर दिखावे के लिये
कमी-ने एक-एक के लिये भरपूर स(द)ड़के है
तुमने आधा जन्म को दुनिया के अदर-बाहर एक-बना दिखाया
दुनिया का अदर साया भरपूर सर-माया पूरा चढ़ाया
तुम कल भी बे-गाने थे
तुम आज भी भ-गाने भले हो
तुम कल भी बह(ी-खा)ने हो
अपवित्र असुर घर के अदर दिखावे के लिये
कमी-ने एक-एक के लिये भरपूर स(द)ड़के है
तुमने आधा जन्म को दुनिया के अदर-बाहर एक-बना दिखाया
दुनिया का अदर साया भरपूर सर-माया पूरा चढ़ाया
चाहे रुखसत हो जुबान की मैली नक़ल
या खफा जाने दो भरपूर की शकल
कल आयने मे आज रुकता रहा
आज भी दुनिया के -माने मे भरपूर बिकता बहा
अग-अग_razi करना कहा सिखाया
wa_c_ing on wor_d’ coo coo y-0-s in()id u
बेडा पर एक गया _ar आया
दुनिया के इक दिन की इक धुप-छुप तड़ी बेज तो तही ता
भरपूर को ग()मी को s_er_ize सारती सा
अब _as_t_oph तो gut के अदर ही आयेगा न और
बहार सोना चम-चक-मकायेगा
दुनिया मे कोई भी भगवन से बड़ा (neither – nor =) नही होता
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ख़ाली मईया की गोदी जैसे ख़ाली तो सारे ही सोने सा
और ख़ाली गोदी ही भगवन को ख़ाली -खती खा
इसी लिए भगवान सुरक्षित ख़ाली साक्षी सक्षम सा
mae ख़ाली हम_ili-tee _ring p_e_ce in()id u
क्या
मा-वा का दुनिया से भरपूर रि-श()ता होता है
जो re()श्ते के अदर ही एक वा को खोता है
अपवित्र असुर ही अपने घर के अदर दुनिया के एक एक को उ-चा-चा रखते है
कहा यह गया मे एक तो ग्वाच ही गाया
_y _other is on _ause of m-y _app_ness
& गोदी तो होगी ही नाराज अदर के दामाद की pit_ness
दुनिया का(की) भरपूर ज़मीन भरपूर आसमान
भरपूर घर बसाते है अदर दुनिया का एक इम्तिहान
आधा जन्म भूल-आते है अदर भरपूर मे()मान
अदर ही भरपूर डुबाये भरपूर उभरे एक महान
तुम-हा-री | हम-आ-री
गोदी की अंदर की जोड़ी है कितनी -यारी
तु-मने हम()री ख़ाली याद को अंदर ही भु-लाया
अपने को ही बाहर रुस्वा भरपूर अदर पाया
उजड़ी हुई दुनिया मे कितने दिल भरपूर जुड़े है
जुड़े हुओ के अदर की भरपूर दुनिया ने ही दिल भरपूर उजाड़े है
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हस-रतो के दाग भरपूर ज़िम्मेदार
बस्ते है भरपूर मन्नतो के बाद भरपूर रस्ते आबाद
now tell lies b-y ys-lf
_ow cou_d u de_end godi’ free_om in()id
bie de_erting godi in()id y on hom eva_u@ing
ever-y1 o_serve on wor_d _oam
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