खो(सो)ए

रिसकी राद में दिन रात ख़ाली खोए


वही सांसो के ख़ाली आँसू पिरोए

ख़ाली बंधन बांध भीतर भिगोए

साँस भी तैरे सारे असीस सोए

ख़ाली जोत गोदी की बहार बोए

प्रेम सरपूर सगे

ख़ाली प्रेम के नितनेम से y-0-s in()id u के अजनबी अंदर आते आ

तू तोड़ के तो तिखा ख़ाली द(घ)र का दरवाजा

डर डही डा डोर डागे तुझे तो अदर भी न मिले सज़ा सरपूर सगे

भुना भड्डू

भरपूर शादी के मुद्दो का मडडू कीचड उछाले घर अदर भरपूर उचड्डू


y-0-s in()id u का लड्डू आधा जनम भी न गोल तारे भरपूर भाड का भड्डू


ज़ज़ा तज़ा की बात पर भरपूर बहाने बहने बो

y-0-s in()id u भरपूर त्यार के तराने तो


भरपूर प्यार पनप पहा पनाह पे
y-0-s in()id u को ही पाना परपूर पी
ख़ाली याद तो गुनाह अंदर अ-वार-गी
मेरे भरपूर को न रुलाना तू रोयेगी भी

कौन काया

अस्थिर ऊर्जा अस्थिर विचार अस्थिर आदते
(सबसे पहले कौन भाया)

सास के दामाद को क्यो (इधर-उधर) पार ही केद्रित करती का

भरपूर क्यो यान का ध्यान सास का अदर-बाहर करता (उड़ाना) धर्ता

अब तलो की बीमा(या)रिया तो gut _ur_ace()all मे तैरती बहरी बेड़िया

इससे सास का दामाद भी तल के ऊपर साफ़ तैरता तेड़िया

भरपूर का भरपूर भडार भायदा भिड़या

an ()tile

घर के अदर तूतू मे मे दुनिया की एक-एक _i pro_ile हो तो

सास के दामाद की हर एक _ile की अदर नही आधा जमन्न घुट्टी घुलती घही घा

गोदी की हर हर ख़ाली बुँदिया miss_le

सासो का भरपूर e*ile

tor_e-do re()ad 2 _ire in()id i_le

का नावा

मनुष्य को तूतू मे मे की दुनिया का एक सत्य तो भरपूर प्यारा पा
और साथ ही अदर भरपूर गाठो के भरपूर तत्व का सत्य भरपूर बुरा बा
स-तुलन इधर-उधर कायम का काया कूर्ण का


बिना अदर सास को मारे बाहर की चिता का दिखावा
तूतू मे मे की दुनिया के एक-एक मे हज़म होता ह()वा हा प()नावा