बीमा(या)रिया तो सास के तल पर भरपूर फैली हुई है
और अब गहरी भी हो जायेगी भरपूर
ऊपर या नीचे
(दोनो ही)
तीनो मुह तो अदर बद ही रहेगे
अब आएगा प्रलय
दामाद होगा ख़ाली निलय
सास सहेगा ख़ाली मलय
बीमा(या)रिया तो सास के तल पर भरपूर फैली हुई है
और अब गहरी भी हो जायेगी भरपूर
ऊपर या नीचे
(दोनो ही)
तीनो मुह तो अदर बद ही रहेगे
अब आएगा प्रलय
दामाद होगा ख़ाली निलय
सास सहेगा ख़ाली मलय
a wit()in d_s-f-un_tional fa_il-y is
_ause of man-is_e-station of on wor_d _ause
_eeds hol f-unctional _ull y-0-s in()id u _aw()s
n-ever s_eal _heat vile _t_nding _ack of adha c_alf
तीनो लोक काँपते है
खाली वीर के आधा-आधे महा आम से
तूतू मे मे की दुनिया मे कोई नही एक का-पता
(काला-पता हो गया)
is wiw o _ull re_aining in()id _ise _ull
क्या खोया क्या पाया
जो न सोया ख़ाली न बोया
भरपूर ही ढोया ख़ाली न धोया
y-0-s in()id u de_erve to be t()eated with in()id res_ect
——
a respect is to ob(edient)serve & obea
(quiet emanating wiw o rae)
c_ose eie qu_etlee
in(out)id emp()ee hae
असुरो और बूंदियो के बीच में मंथन
सृष्टि गोदी का अमृत पूर्ण समर्पण
काल रात्रि है मधानी का सारा दर्पण
और आधे बैठा है निचे ध्यानी
नीलपंथ अभी हुआ अंदर का ज्ञानी
कब ख़तम हो कलयुगा की भरपूर निशानी
आधे की ख़ाली आंखे श्राप है
अपवित्र असुर अदर के बाप है
इधर उधर के भरपूर आप है
बिन मा के बचे अदर के पाप है
आधे की ख़ाली ज़ुबान की साधना के अ()लाप है
जिसको सृष्टि गोदी की ख़ाली चुपी का एहसास नहीं
उसे अपने अंदर की शांति के परिश्रम का ख़ाली विश्वास नहीं
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