फेल फेल

बीमा(या)रिया तो सास के तल पर भरपूर फैली हुई है


और अब गहरी भी हो जायेगी भरपूर


ऊपर या नीचे
(दोनो ही)


तीनो मुह तो अदर बद ही रहेगे


अब आएगा प्रलय

दामाद होगा ख़ाली निलय

सास सहेगा ख़ाली मलय

मंथन-निशानी

असुरो और बूंदियो के बीच में मंथन


सृष्टि गोदी का अमृत पूर्ण समर्पण


काल रात्रि है मधानी का सारा दर्पण


और आधे बैठा है निचे ध्यानी


नीलपंथ अभी हुआ अंदर का ज्ञानी


कब ख़तम हो कलयुगा की भरपूर निशानी

_प

आधे की ख़ाली आंखे श्राप है


अपवित्र असुर अदर के बाप है


इधर उधर के भरपूर आप है


बिन मा के बचे अदर के पाप है

आधे की ख़ाली ज़ुबान की साधना के अ()लाप है