तुम-हारे मूह से पहला शब्द शिकस्त शाकाल शिकला
_un-ty @tac un()कल
फैला फिसला फूला फिसला
तुम-हारे मूह से पहला शब्द शिकस्त शाकाल शिकला
_un-ty @tac un()कल
फैला फिसला फूला फिसला
कलयुग का कार(गार)नामा
जब अदर नही पहनता ऊपर
तो बाहर क्यो दिखाये निचे का घर नगा नुपुर
क्यो कही ने पैदा किया
b_a(बर)bo_s
बाहर सामने आने के लिये अदर का बहाना
घर के अदर किसने सिखाया
हल्ला-हेरि हाहा ह(प)ढ़ाया
मा-बाप निशाना भरपूर बनाया
अरे देखो आधे कब्र से उभर आया
आधे अंदर इज़्ज़त क्या होती है
भरपूर पैरो तले रोलती
ख़ाली माँ की गोदी की मिट्टी
t_ink car()fu_ly be_or u let y-0-s _lay
1 _or_d _am & in()id 0s _ham s_ar
1 _or_d’ va_loos of 1 pri_ri_ies
_ho le out_pok c_oss a _in
_hi_ch t_ing 0 go y-1 _ae
0 _eat _ead ho_se
0 re=ent b_ing le_t out
वास्तु शास्त्रा के अनुसार
सृष्टि गोदी के अंदर
हर वस्तु को मोल
अन्न के बराबर का बोल
और असुरो के नसीब मे
दु()रूप-योग का भोग
भुलाया अदर का भोल
0_ing _ess t_an su_1
wan_ mo_ than_ 0_ing _um
0_ing is in()id a_g_ry _um
पीठ पीछे क्यो कही रख के
सूर्य के सामने मोह का मूह रख के चलते है
तो आमने-सामने कहा मिलते है
सूर्य पीछे पलते पा
not_ing is to_al-li tra_n_parent
ever-y1-thing is _er_orming in()id p@ent
or ho_sum _it-w_ong _ae ren_
सृष्टि गोदी के अंदर आधे घर के
अंदर के भरपूर (e)नाम
अपाहिज
बंजारन
अनाथ
(i)do u _av s_ill _ag on आधा जन्म
2 re_urn 0s tra_ma 2 re_lace
4 1 _ain सोमा
sea_ch y-0-s c_edit car_ kee_
u out of y ()sight yar_
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